के एल में इसरो  दिखा रहा साइकिल पर रॉकेट पार्ट्स ढोने से लेकर गगनयान तक का सफर

 वैज्ञानिक कर छात्राें की जिज्ञासा को शांत 

मेरठ।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की 'स्पेस ऑन व्हील्स' बस  में इसरो के सफर को इस तरह से दर्शाया गया है, कि कोई भी छात्र आसानी से समझ सकता है। इस व्हीकल के साथ इसरो के वैज्ञानिक भी चल रहे हैं, जो  छात्रों  को सारी जानकारियां दे रहे है। 

इसरो के रिटायर्ड वैज्ञानिक परेश सरवईया ने बताया कि यह इसरो की तरफ से आउटरीच कार्यक्रम है. इसके तहस हम स्पेस ऑन व्हील्स के साथ देश के अलग-अलग राज्यों और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचते हैं. ताकि ग्रामीण लोगों को भी इसरो के मिशन की जानकारी दी जा सके। इसीलिए यह खास स्पेस ऑन व्हील्स तैयार किया गया है. इसे देखकर आसानी से इसरो के सफर को समझा जा सकता है। इसी कार्यक्रम के तहत अहमदाबाद के विक्रम साराभाई संस्थान द्वारा आयोजित अंतरिक्ष प्रदर्शनी मेरठ में तीन दिन के लगाई गई है।

अंतरिक्ष प्रदर्शनी को लीड कर रहे रिटायर्ड साइंटिस्ट परेश सरवईया ने बताया कि 1960 के दशक में इसरो के वैज्ञानिक साइकिल पर रॉकेट के पार्ट्स लेकर जाते थे। बैलगाड़ी के माध्यम से सेटेलाइट ले जाया जाता था.। पहली सेटेलाइट आर्यभट्ट लांच   किया गया  । तब से लेकर अब हम गगनयान की लांचिंग तक पहुंच चुके हैं। इस व्हीकल में इसी सफर को दर्शाया गया है। इसमें आर्यभट्ट की लांचिंग से लेकर पीएसएलवी, जीएसएसवी जैसे प्रक्षेपण यान तक प्रदर्शित किए गए हैं। 

उन्होंने बताया कि हमने गगनयान के लिए तैयार HLV व्हीकल का मॉड्यूल को भी इसमें लगाया है। इस वाहन में रिमोट सेंसिंग सेटेलाईट, कम्युनिकेशन सेटेलाइट, नेवीगेशन सेटेलाइट के मॉडल भी लगे हैं, ताकि लोगों को आसानी से समझाया जा सके। 

 दिल्ली अर्थ स्टेशन मेंसाइंटिस्ट राहुल गर्ग  का कहना है  कि हमारा मूल उद्देश्य यही है, जो भी छात्र  या जिज्ञासु यहां आएं उन्हें सारी जानकारी वैज्ञानिकों की टीम द्वारा दी जाए।हम छोटे शहरों में पहुंच रहे हैं, जहां बच्चों में बहुत जिज्ञासा होती है. उन्होंने बताया कि हमारा यह व्हीकल उत्तर भारत का सफर कर रहा है। इसमें जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक के राज्य हैं। यूपी, एमपी, बिहार सभी राज्यों में हम पहुंच रहे हैं।




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