संविधान दिवस पर ‘हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान’ विषय पर विविध कार्यक्रमों का सफल आयोजन
मेरठ। सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा संकायाध्यक्षा एवं प्रधानाचार्या प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के संरक्षण में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में निदेशक राजेश चन्द्रा ने कहा कि नशीली दवाओं की लत विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप अपराध दर में वृद्धि, तनावपूर्ण संबंध और अनेक सामाजिक समस्याएँ जन्म लेती हैं। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार का यह दायित्व है कि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पदार्थों के सेवन पर नियंत्रण लगाए। यह शपथ ग्रहण कार्यक्रम लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संकायाध्यक्षा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई ने कहा कि आनुवंशिक कारक, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, उपेक्षा तथा बिगड़ा हुआ पारिवारिक वातावरण नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने सभी उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नशा मुक्त समाज एवं राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाया। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में डॉ. सारिका त्यागी, डॉ. प्रेम चन्द्रा, डॉ. आफरीन अलमास, शालिनी गोयल, एना सिसोदिया, सोनल जैन, मुस्कान, अरशद आलम, आशुतोष देशवाल, अनुराग सहित शिक्षक एवं छात्र–छात्राएँ उपस्थित रहे।
उसी क्रम में सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलेज द्वारा संविधान दिवस के अवसर पर हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान विषय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रृंखला में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसका निर्देशन निदेशक श्री राजेश चन्द्रा एवं संरक्षण प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आफरीन अलमास ने किया।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल भारतीय, संकायाध्यक्ष (अनुसंधान एवं विकास) एवं निदेशक (अनुसंधान), स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय रहे। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों पर सार्थक विचार व्यक्त किए। अपने विस्तृत संबोधन में उन्होंने 1833 के ब्रिटिश प्रशासनिक ढांचे, 1935 के भारत सरकार अधिनियम को प्रथम व्यापक संवैधानिक दस्तावेज के रूप में, तथा उसके अंतर्गत स्वतंत्रता, समानता, न्याय एवं अधिकारों की स्थापना के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम ने भारतीय प्रांतों को आंशिक स्वायत्तता तो दी, परंतु रक्षा, विदेश नीति, वीटो शक्ति जैसी प्रमुख शक्तियाँ ब्रिटिश शासन के पास ही रहीं, जिसके कारण स्वतंत्रता की माँग और तेज हुई।
उन्होंने संवैधानिक ढांचे में निहित विचार-विमर्श, दूरदर्शिता और भारतीय संविधान निर्माताओं द्वारा मौजूदा परिस्थितियों का विवेकपूर्ण विश्लेषण कर लिए गए निर्णयों पर प्रकाश डाला। बीएएलएलबी चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी ओम ठाकुर द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया गया और सभा को संविधान के प्रति निष्ठावान बने रहने की शपथ दिलाई गई।
संविधान दिवस पर आयोजित अन्य गतिविधियों में, सुभारती लॉ कॉलेज के शिक्षकों द्वारा ईश्वर चन्द्र विद्यासागर श्रमिक बाल विद्यालय में विद्यार्थियों को गुड टच–बैड टच, बाल अधिकार, बाल सुरक्षा एवं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जागरूक किया गया। इस जागरूकता सत्र में एना सिसोदिया तथा अरशद आलम ने बच्चों को सुरक्षित बचपन, दुर्व्यवहार से बचाव, कुपोषण, तस्करी, छेड़छाड़ आदि विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
इसके अतिरिक्त लॉ कॉलेज की सांस्कृतिक समिति द्वारा ई–पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने संविधान के मूल्यों न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व को केंद्र में रखते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं संविधान निर्माताओं को अपनी रचनात्मक श्रद्धांजलि प्रदान की।
कार्यक्रम में डॉ. सारिका त्यागी, डॉ. प्रेमचन्द्र, सोनल जैन, शालिनी गोयल, अरशद आलम, आशुतोष देशवाल, मुस्कान श्रीवास्तव, डॉ. लुभान सिंह, संघमाता डॉ. मुक्ति भटनागर शोधपीठ के प्रतिनिधि श्री राजकुमार सागर सहित बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएँ उपस्थित रहे।


No comments:
Post a Comment