राज्य सभा में शून्य काल में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी कांत बाजपेई ने उठाया हाई कोर्ट का मुद्दा

बोले मेरठ ही नहीं मेरठ, आगरा, गोरखपुर और काशी चार बेंचें मिलनी चाहिए 

प्रयागराज और लखनऊ हाईकोर्ट के क्षेत्रों का पुनर्निधारण होना चाहिये

हाईकोर्ट बेंच की 50 वर्ष पुरानी माँग है

मेरठ। बुधवार को राज्यसभा सांसद लक्ष्मी कांत बाजपेई राज्य सभा के शून्य काल में हाई कोर्ट का मुद्दा जोरदर ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि अब तो मेरठ ही नहीं आगरा, गोरखपुर व काशी को बेचें मिलनी चाहिए। 

 राज्यसभा में बोलते हुए राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मी कांत वाजपेयी ने कहा मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की मांग पचास साल पुरानी है। बाेले  आबादी, क्षेत्रफल, 10 लाख 33000 हजार लंबित मुकदमों के आधार पर न्याय संगत माँग है।63 प्रतिशत से भी अधिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।वर्ष 1986 में माननीय अटल जी ने लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष के नाते इसका समर्थन किया था।मुख्यमंत्री डॉ. सम्पूर्णानन्द ,  नारायण दत्त तिवारी, रामनरेश यादव , बाबू बनारसी दास , सुश्री मायावती के कार्यकाल में राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था।

21.07.1986 को राज्य सभा में तत्कालीन विधि मंत्री माननीय  हंसराज जी ने भी बेंच का समर्थन किया था। सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने नसीरूद्दीन बनाम स्टेट ट्रांसपोर्ट अपील ट्रिब्यूनल में 1997 AIR पृष्ठ 313 में यूपी हाईकोर्ट अमलगमेशन ऑर्डर 1948 के पैरा 7 व 14 में विस्तृत व्याख्या की है और कहा है कि -इलाहाबाद में कोई स्थायी सीट नहीं, इलाहाबाद व लखनऊ की सीट परिवर्तित की जा सकती है।विधि आयोग ने तो 07.08.2009 में तो सुप्रीम कोर्ट की चार बेंच की सिफारिश की थी।

 बोले  इलाहाबाद में जजों के 160 पद स्वीकृत हैं, कार्यरत 70 हैं।लंबित वाद की तुलना में कम से कम 200 जज चाहिए।15.04.2023 को सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस का निर्णय था कि आज से 15 दिन के बाद कोई कोर्ट हाईब्रिड सिस्टम से सुनवाई के लिए मना नहीं कर सकेगी ।वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने देश के प्रत्येक जिले में 440 ई-फाईलिंग सेंटर बनाने की निर्णय लिया व बजट में 744 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी।अन्य सभी राज्यों में ई-फाईलिंग सेंटर प्रारंभ हो गये हैं।

प्रयागराज उच्च न्यायालय ने  23.04.2023 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ई-फाईलिंग सेंटर स्थापित करने की सहमति भी दी थी। उस पर कार्य भी प्रारंभ हुआ।अचानक28.10.2023 को ई-फाईलिंग सेंटर स्थापित करने के अपने आदेश दिनांक 23.04.2023 को Kept in Abeyance रखने का आदेश जारी कर दिया।

क्या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कोर्ट रूम में दिया गया आदेश किसी राज्य के हाई कोर्ट के प्रशासनिक आदेश से Kept in Abeyance रखा जा सकता है। यह सीधे-सीधे माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और भारत सरकार के निर्णय के विरुद्ध यह अवैधानिक आदेश भी जारी कर दिया कि ई-फाईलिंग सेंटर से वाद केवल प्रयागराज बार में पंजीकृत वकील ही कर सकेंगे।

 बाेले जब मुंबई हाईकोर्ट की 5वीं बेंच कोल्हापुर में दी जा सकती है।जब उत्तर प्रदेश में 2 लाख 40 हजार 928 किलोमीटर का क्षेत्र, 75 जिले, 18 मंडल, जनसंख्या 24 करोड़ और परिधि 890 वर्ग किलोमीटर व 10 लाख 33000 लंबित केस ।तब उत्तर प्रदेश में 50 साल से अधिक समय से लंबित ये मांग क्यों नहीं पूरी की जा सकती है।

अब तो उत्तर प्रदेश में न्याय संगत तरीके से मेरठ, आगरा, गोरखपुर और काशी चार बेंचें मिलनी चाहिए और प्रयागराज और लखनऊ हाईकोर्ट के क्षेत्रों का पुनर्निधारण होना चाहिये। भारत सरकार से ये मेरी माँग है।

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