चुनौतियों में बने नए इतिहास
 राजीव त्यागी 
वर्ष 2025 भारत और विश्व के लिए घटनाओं से भरा एक असाधारण कालखंड रहा। यह वर्ष अनुभवों, उपलब्धियों, त्रासदियों, संघर्षों और उम्मीदों की एक जीवंत कहानी बन गया। शायद ही कोई महीना ऐसा रहा हो जिसने समाज, राजनीति, कूटनीति, विज्ञान, खेल या जनमानस को किसी न किसी रूप में प्रभावित न किया हो। आपको बता दें कि साल की शुरुआत प्रयागराज महाकुंभ से हुई, जिसने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति का विराट प्रदर्शन किया। करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना दिया। 



यह आयोजन आस्था और सुरक्षा के संतुलन की आवश्यकता का प्रतीक बन गया। इसके बाद खेल से लेकर अंतरिक्ष तक तमाम प्रतिमान गढ़े गए। वहीं आखिरी महीना दिसंबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। रूस के राष्ट्रपति के भारत दौरे से रक्षा और ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिली। 
इसी माह बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया। मनोरंजन जगत के लिए यह वर्ष भावनात्मक क्षति से भरा रहा। धर्मेंद्र, असरानी और मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के निधन ने सिनेमा जगत को गहरे शोक में डाल दिया। यह केवल कलाकारों का नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अवसान था।


 देखा जाये तो समग्र रूप से वर्ष 2025 चेतावनी, सीख और संकल्प का वर्ष बनकर सामने आया। इसने सिखाया कि विकास, आस्था और उत्सव के साथ साथ सुरक्षा, संवेदनशीलता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। यह वर्ष भारत को अधिक सतर्क, अधिक संगठित और भविष्य के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देकर गया।

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