विज्ञान और समाज के बीच सेतु बने शोध: प्रो. भोलाराम गुर्जर

सीसीएसयू के भौतिकी विभाग में प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप का आयोजन

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की 'रिसर्च टेक्नीक्स इन फोटॉनिक्स एंड मटेरियल्स साइंस-2025' विषय पर प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसमें देश के प्रमुख संस्थानों से आए विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं ने फोटॉनिक्स और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में नवीन शोध तकनीकों और प्रयोगात्मक विधियों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. भोलाराम गुर्जर ने कहा कि भौतिकी के शोध विज्ञान और समाज के बीच सेतु बनने का काम करे।  ​

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। उन्होंने भौतिक विज्ञान विभाग के शोध प्रकाशनों, पेटेंट्स एवं पुस्तकों की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रतीक बताया। सम्मेलन के संयोजक प्रो. अनिल कुमार मलिक ने फोटॉनिक्स और मटेरियल्स साइंस के क्षेत्र में तीव्र गति से हो रही प्रगति तथा इसके वैज्ञानिक और तकनीकी अनुप्रयोगों की बढ़ती महत्ता पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. भोलाराम गुर्जर ने युवा शोधकर्ताओं से नवाचार, स्वायत्त चिंतन और भारतीय प्राचीन वैज्ञानिक परंपराओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल रैंकिंग या प्रकाशन नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थानीय समस्याओं जैसे कृषि उत्पादकता, पशु स्वास्थ्य और रोगों की शीघ्र पहचान जैसे क्षेत्रों में समाधान-केंद्रित शोध करने का आग्रह किया। 

अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. बीरपाल सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया। विशिष्ट अतिथि गणित विभाग के प्रो. मृदुल गुप्ता ने फोटॉनिक्स के चिकित्सा निदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कविता शर्मा और आयोजन सचिव प्रो. नीरज पंवार रहे। कार्यक्रम में प्रो. संजीव कुमार (राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, इटानगर, अरुणाचल प्रदेश), प्रो. शैलेन्द्र शर्मा (डीन कृषि सीसीएसयू मेरठ), प्रो. अनुज त्यागी (रेडियोलॉजी विभाग, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ), प्रो. राजन वालिया (भौतिकी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) और प्रो. अखिलेश कुमार सिंह (आईआईटी बीएचयू, वाराणसी) समेत प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी शामिल हुए।

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