जागरूकता से ही प्रीमेच्योर नवजातों को बचाया जा सकता है-डॉ अमित उपाध्याय 

 प्री मैच्योर दिवस पर  जागरूक  कार्यक्रम का आयेाजन 

 मेरठ।देश में कितने बच्चे प्रति वर्ष पैदा होते है नमे कितने प्रीमेच्योर होते है ?विश्व प्रीमैच्योरिटी दिवस पर हम उन लाखों परिवारों की आवाज बनते हैं जिनके बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं और जीवन की शुरुआत ही संघर्ष से करते हैं। जरा सी जागरूकता पर ऐसे नवजात बच्चों को बचाया जा सकता है जो प्रीमेच्योर होते हैं। यह बातें न्यूटीमा हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अमित  उपाध्याय ने विश्व प्रीमेच्योर डे पर कही।

इस दौरान उन्होंने अस्पताल में जन्म देने वाली प्रीमेच्योर बीवी की माताओ से कहा कि प्रीमेच्योर होने से बच्चे को क्या नुकसान होता है ? क्या बहुत कम समय पर पैदा होना जानलेवा भी हो सकता है? प्रीमेच्योर बच्चे के बचने पर  क्या उसे आगे दिक्कत रहती है । बताया कि भारत में हर साल 2.5 करोड़ 67,000 70,000 प्रति दिन बच्चे पैदा होते है, 20% of all world birth, लगभग 35 लाख शिशु समय से पहले जन्म लेते हैं-यानी हर 10 में से 1 बच्चा (10%) प्रीमैच्योर होता है। इन छोटे नवजातों को संक्रमण, साँस की कमी, शरीर का तापमान बनाए रखने में कठिनाई, रक्तचाप और मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताओं, आँखों-कानों की समस्याओं और विकासात्मक चुनौतियों का अधिक जोखिम होता है।

क्या माँ में किसी परेशानी से प्रीमेच्योर पैदा होने की सम्भावना बढती है 

समय से पहले जन्म के कारणों में माँ की हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, एनीमिया, थायरॉयड, संक्रमण, IVF प्रेग्नेंसी, जुड़वा मल्टीपल प्रेग्नेंसी, तनाव, धूमपान-शराब का सेवन, कम उम्र या अधिक उम्र में गर्भधारण, Previous preterm delivery, प्लेसेंटा की समस्याएँ और कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट कारण के भी अचानक प्रीटर्म लेबर शामिल हैं।

 दिवस क्यो मनाया जाता है 

आज के दिन हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हर प्रीमैच्योर बच्चा "नाजुक नहीं" बल्कि "विशेष देखभाल योग्य" होता है, और सुरक्षित शुरुआत उसके भविष्य को बदल सकती है। नवजात सुरक्षा (Newborn Safety) की थीम हमें याद दिलाती है कि NICU में विशेषज्ञ टीम, संक्रमण-नियंत्रण, सुरक्षित ऑक्सीजन थेरेपी, कंगारू मदर केयर, स्तनपान सहयोग और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग इन बच्चों की जान बचाने की कुंजी हैं। हम समाज और माता-पिता से अपील करते हैं कि समय पर ANC चेक-अप, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, प्रसव-पूर्व स्टेरॉयड, और सुरक्षित डिलीवरी सेंटर चुनकर हम प्रीमैच्योरिटी की दर और उससे जुड़ी जटिलताओं को कम कर सकते हैं। हर प्रीमी बच्चा एक योद्धा है-उसे बस सही समय पर सही देखभाल और सुरक्षित वातावरण देने की आवश्यकता है।

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