संविधान दिवस पर वेंक्टेश्वरा में राष्ट्रीय संगौष्ठी एवं सम्मान समारोह
भारत में इतनी सारी जातियो, धर्मो, पंथो, भाषाओ समेत विश्व में सबसे अधिक विविधताओ को अपने अन्दर समेटे देश के प्रत्येक नागरिक को ’’समान अधिकार’’ देने वाला हमारा संविधान निसन्देह दुनिया का सबसे ताकतवर संविधान है- सुधीर गिरि,
- भारतीय संविधान एक सौ चालीस करोड़ भारतीयो की ’’आत्मा’’ इसमें निहित ’’मौलिक अधिकारो’’ पर सभी का बराबर का हक, लेकिन इसमें दिये गये ’’मौलिक कर्तव्यो’’ का जिम्मेदारी से निर्वहन भी प्रत्येक नागरिक की राष्ट्र के प्रति जबावदेही- डाॅ. राजीव त्यागी,
मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में भारतीय संविधान दिवस (26 नवम्बर) के अवसर पर ’’भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता अखण्डता एवं सामाजिक न्याय का संवाहक’’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगौष्ठी एवं सम्मान समारोह का शानदार आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं संविधान विशेषज्ञ अंकिता सिंह समेत एक दर्जन से अधिक वरिष्ठ कानूनविदो ने प्रतिभाग करते हुए भारतीय संविधान को ’’अनेकता में एकता’’ का आधार बताते हुए इसे राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व सामाजिक न्याय का आधारस्तम्भ करार दिया।
श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान के अब्दुल कलाम सभागार में भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर ’’भारतीय संविधान राष्ट्रीय एकता, अखण्डता एवं सामाजिक न्याय का संवाहक’’ विषय पर आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगौष्ठी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सुश्री अंकिता सिंह, प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विनीत सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ0 मधु चतुर्वेदी, कुलसचिव प्रो0 पीयूष पाण्डेय, डाॅ0 राजेश सिंह, आई.बी.एम. से ध्रुव चैधरी आदि ने सरस्वती माँ की प्रतिमा के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।
अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि सुश्री अंकिता सिंह ने कहा कि इतनी भाषाऐ धर्म, पंथ, जातिया, रीति रिवाज के साथ देश के एक सौ चालीस करोड़ भारतीयो के ’’मूल अधिकारो का रक्षक’’ एवं अखण्डता व सामाजिक न्याय का संवाहक भारतीय संविधान निश्चित रूप से दुनिया का सबसे खूबसूरत एवं शक्तिशाली संविधान है। लेकिन यह बहुत ही गम्भीर विषय है कि हम अपने मौलिक अधिकारो की तो बात करते है, उनको पाने के लिए लड़ाई लड़ते है, लेकिन जब बात राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी से ’’मौलिक कर्तव्यो’’ के निर्वहन की होती है, तो हम इससे पल्ला झाड लेते है। अखण्ड भारत एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए हमे अपने ’’मौलिक अधिकारो’ के साथ-2 संविधान में निहित अपने ’’मौलिक कर्तव्यो’’ के प्रति जिम्मेदार होना पड़ेगा।
एकदिवसीय राष्ट्रीय संगौष्ठी से वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय हरदीप सिंह, प्रो पीयूष पाण्डेय, डाॅ. मधु चतुर्वेदी आदि ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर डायरेक्टर एकेडमिक डाॅ राजेश सिंह, डाॅ. नीतू पंवार, डाॅ सुमन कुमारी, डीन लाॅ डाॅ राजवर्द्धन सिंह, डी.पी. सिंह, डाॅ. योगेश्वर शर्मा, डाॅ. दर्पण कौशिक, डाॅ. स्नेहलता, डाॅ. आशुतोष, डाॅ. एस.के. श्रीवास्तव, एस.एस. बघेल, अरूण गोस्वामी, मारूफ चैधरी, मेरठ परिसर से निदेशक डाॅ. प्रताप सिंह एवं मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।




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