युवा शक्ति से ही होगा राष्ट्र निर्माण: राजेंद्र अग्रवाल
मेरठ। आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ (IQAC), मेरठ कॉलेज द्वारा आयोजित "दीक्षारंभ : कदम से कामयाबी तक" कार्यक्रम के तीसरे दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। जिसकी थीम “राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डॉ. राजेन्द्र अग्रवाल, प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओ पी अग्रवाल, सचिव विवेक गर्ग, प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह द्वारा दीप-प्रज्वलन के साथ किया गया।
पूर्व सांसद डॉ. राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा में छात्र का पहला कदम भले ही छोटा हो परन्तु वह दिशा तय कर देता है और संकल्प को मूर्त रूप प्रदान करता है। मेरठ के विषय में उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद टाउन हॉल स्थित तिलक पुस्तकालय से प्रतिदिन एक पुस्तक अध्ययन करने हेतु लेकर जाते थे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों हेतु दीक्षांत कार्यक्रम की तरह दीक्षारंभ कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण है। पूर्व सांसद महोदय ने अंग्रेजी के प्रख्यात कवि वर्ड्सवर्थ की एक घटना को उल्लेख करते हुए कहा की ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं वरन सजग रहकर आप अपने परिवेश के निरीक्षण से भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।
डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने छात्रों को उचित दिनचर्या के साथ ही जंक फूड से परहेज करने हेतु कहा। उन्होंने कहा कि उन्नति के लिए छात्रों को अपने से होशियार छात्र की संगति करनी चाहिए। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि मेरठ कॉलेज शिक्षा की परंपरा और उत्कृष्टता का प्रतीक है, और विद्यार्थियों को इसका गौरव बनाए रखने के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए।
विवेक गर्ग ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि महाविद्यालय सदैव उनके सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
प्राचार्य प्रो. युद्धवीर सिंह ने छात्रों को अद्भुत विरासत वाले कॉलेज में प्रविष्ट होने हेतु बधाई देते हुए भारतीय ज्ञान के परिचायक ग्रंथों से शिक्षा प्राप्त करने हेतु कहा।
आई क्यू ए सी समन्वयक प्रो. अर्चना सिंह ने विद्यार्थियों को विद्यार्थियों हेतु हितकारी कॉलेज में संचालित विभिन्न क्लबों प्रयास, संकल्प, प्रकृति आदि से अवगत कराया।
सरस्वती छात्रावास की वार्डन प्रो. श्वेता जैन ने नव प्रवेशित छात्राओं को छात्रावास के शुल्क व सुविधाओं के विषय में बताया।
कॉलेज की छात्रा वीनस ने सोशल मीडिया की आदतों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया अग्नि की तरह है, इसका उचित उपयोग जीवन को प्रकाशित करता है जबकि अनुचित उपयोग आशाओं को जला भी सकता है।कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. अर्चना सिंह, प्रो. सीमा पंवार एवं प्रो. अनिल राठी, प्रो. नीरज कुमार, प्रो. कपिल सिवाच, प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज, प्रो. पंजाब सिंह मलिक, प्रो. पवन, प्रो. सचिन, प्रो. अनुराधा, प्रो. मनोज सिवाच, प्रो. संदीप, डॉ. दिनेश, डॉ. हरगुन साहनी, डॉ. पंकज कुमार भारती, डॉ. अरविंद, डॉ. मुकेश सेमवाल, डॉ. विनय आर्य, डॉ. गौरव, डॉ. यूनिक अरोड़ा, श्री घनश्याम यादव उपस्थित रहे।


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