शिक्षा का अभिप्राय ही जनमानस में संचेतना जागृत करना- प्रो संगीता शुक्ला 

पोषण पर भाषण एवं मातृ सम्मलेन कार्यक्रम का आयोजन 

 मेरठ। सीसीएसयू  संस्थान के सेमिनार हॉल में साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के द्वारा सेवा पखवाड़ा अभियान के अन्तर्गत महिला अध्ययन केन्द्र एवं विधि अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में पोषण पर भाषण एवं मातृ सम्मलेन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 कार्यक्रम का शुभारम्भ  कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, प्रो. बिन्दु शर्मा, प्रो. अरूणा वर्मा, प्रो. राजीव श्रीवास्तव, डा. सरिता त्यागी, डा. स्वेता शर्मा, कुलसचिव डा. अनिल कुमार यादव एवं संस्थान के समन्वयक डा. विवेक कुमार द्वारा मॉ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया गया। 

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला  ने विद्यार्थियों को शुभाशीष देते हुये कहा कि शिक्षा का अभिप्राय ही जनमानस में संचेतना जागृत करना है। जिससे समाज जीवन्तता को प्रापत करें। ऐसे आयोजन समाज मे नई ऊर्जा का संचार करते है और उन्होने सभी प्रतिभागियो से समाज में जागरूकता एवं स्वच्छता संदेश घर-घर ही नही अपितु व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुचाने का आहवान किया। 

कार्यक्रम में डा. विवेक कुमार ने अथितियों का स्वागत एवं परिचय दिया। उन्होंने कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुये कहा कि सेवा पखवाड़ा अभियान का मुख्य उद्देश्य अपने व्यवहार, आचरण एवं ज्ञान से समाज की सेवा करते रहना है। उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षक और चिकित्सक का महत्वपूर्ण स्थान है तथा दोनो ही समाज के हित में कार्य करते है। इसके पश्चात उन्होने कहा कि माता का स्वस्थ्य एवं सुरक्षित रहना आवश्यक है, तभी समाज उन्नति एवं प्रगति कर सकता है।

कार्यक्रम में महिला अध्ययन केन्द्र की समन्वयक प्रो्. बिन्दु शर्मा ने अपने विचार रखते हुये कहा कि आज बेटा एवं बेटी एक समान है और माता पिता बेटी को समान शिक्षा व भोजन व्यवस्था करते है।   इसलिये जिन महिलाओं एवं बालिकाओं को पर्याप्त पोषण नही मिल रहा है, उनको जानकारी देने की आवश्यकता है। उन्होंने प्लास्टिक की बोतल एवं प्लेट का प्रयोग करने से मना किया। क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है।

कार्यक्रम में प्रो. अरूणा वर्मा, यूनिट हैड, डिर्पाटमेन्ट ऑफ गाईनाकोलाजी, एल.एल.आर.एम., मेडिकल कॉलेज, मेरठ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सभी के लिये बहुत आवश्यक है तथा स्वस्थ नारी ही  स्वास्थ्य समाज की नींव रख सकती है जो देश की प्रगति के लिये बहुत ही आवश्यक है। उन्होने गर्भावस्था से पूर्व व गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं से सभी को अवगत कराया तथा जन्म देने के पश्चात माँ और बच्चे दोनो का ध्यान रखना परिवार की प्रथम जिम्मेदारी होती है। उन्होने यह भी बताया कि महिलाओं के लिये हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी मातृ शक्ति अभियान तथा बच्चो के स्वास्थ्य के लिये अनेको योजनाओं के बारे में बताया। 

प्रो. राजीव श्रीवास्तव, महावीर विवि ने अपने उद्बोधन में चाणक्य की शुक्तियों का उल्लेख करते हुये कहा कि महिला को पुरूषो से दो गुना अधिक भोजन करना चाहिए। उन्होने कहा कि आहार एवं पोषण एक दूसरे से सम्बन्धित है। स्त्री घर की धुरी होती है। भारत की परम्परा के अनुसार व्यक्ति को दो बार खाना खाना चाहिये। उन्होने  आगे कहा कि एक महिला के साथ पूरा परिवार बंधा होता है, महिला के बीमार होने से परिवार की दिनचर्या प्रभावित होती है। इसलिये देश और ऋतु के अनुसार आहार लेना चाहिए। उन्होने अयुक्तियुक्त आहार जैसे मछली एवं दूध एक साथ नही लेना चाहिये आदि के बारे में जानकारी दी।  

कार्यक्रम में डा. सरिता त्यागी ने अपने विचार रखते हुये कहा कि कमजोर वर्ग की महिलायें के लिये आज भी पोषण का अभाव है और उनका शोषण हो रहा है, उनको मानसिक और शारीरिक रूप उत्पीडन किया जा रहा है। इसलिये आज के युवा को संकल्प लेना चाहिये कि वो ऐसे वर्ग के पुरूष और महिलाओं को जागरूक करें। उन्होने आगे कहा कि स्वास्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मष्तिक का निर्माण होता है।  उन्होने आगे कहा कि ऋतु के अनुसार फल एवं सब्जियां खाये एवं गर्भवती महिलाओ को फास्टफड छोड़कर गोलगप्पे, चाट, दहीबडा आदि खाने की सलाह दी। 

डा. स्वेता शर्मा ने अपने विचार रखते हुये डब्लू.एच.ओ. के द्वारा दी गयी स्वास्थ्य की परिभाषा को समझाया। उन्होंने स्वास्थ्य के लक्षण बताते हुये कहा कि यदि हमे थकान हो रही है, कभी हमे हल्का बुखार है, हम कमजोरी महसूस कर रहे है, तो हम स्वस्थ नही है। उन्होने विद्यार्थियों को शारीरिक व्यवयाम और भोजन पर विशेष ध्यान देने के लिये प्रेरित किया। कार्यक्रम में विधि अध्ययन संस्थान की छात्राओं में अनुष्का त्यागी, संजीवनी गुप्ता, प्रांजुली त्यागी, अनुष्का सिसौदिया, ज्योति, अंशिका, रितिका एवं उजमा आदि ने अपने विचार प्रस्तुत किये।  कार्यक्रम में डा. सुदेशना, डा. कुसुमा वती, आशीष कौशिक, डा. विकास कुमार, डा. सुशील कुमार शर्मा, डा. मीनाक्षी, डा. शेख अरशद,  उपासना, एवं डा. वैशाली पाटिल, चरक स्कूल ऑफ फार्मेसी, अमरपाल,योग विभाग सम्मिलित रहे और विश्वविद्यालय के अन्य विभागो के शिक्षक एवं छात्र-छात्रायें भी उपस्थित रहे।

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