लोहिया नगर कूड़े पहाड़ पर सख्ती, पांच करोड़ की होगी निगम से वूसली 

एनजीटी ने डीएम से वसूली सुनिश्चित करने व नगरायुक्त को छ सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का दिया आदेश 

 मेरठ। एनजीटी ने मेरठ के हापुड़ रोड स्थित लोहिया नगर में कूड़े के पहाड़ का निस्तारण न होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एनजीटी की प्रधान पीठ ने प्रदेश सरकार को लोहिया नगर में कचरा निपटान सुविधा के निर्माण के सबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस सबंध में नगरायुक्त को दो सप्ताह में  हलफनामा दाखिल करना है। वही  उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ओर से पांच करोड़ का जुर्माना वसूली के मामल में भी डीएम डा वी के सिंह को कार्रवाई सुनिश्चित करने और जवाब मांगा है। 

 यह आदेश एनजीटी ओर से 18 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान दिया गया। आदेश अब अपलोड़ हुआ है। लोहिया नगर कूड़े के पहाड़ का यह मामला सामाजिक कार्यकत्र्ता लोकेश खुराना द्वारा दायर किया गया था। जिसमें मेरठ नगर निगम द्वारा लोहिया नगर में ठोस कचरे के डंपिग पर चिंता जताई गयी थी। याचिका कत्र्ता के वकील आकाश वशिष्ठ नेपीठ  को सूचित किया कि नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग नौ सौ मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है और कचरा निस्तारण के लिए कोई उपयुक्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति  प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्यों  डा. ए सेंथिस वेल और इंजीनियर ईश्वर सिंह की पीठ ने पाया कि 16 अप्रैल 2025 के पिछले आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। 



 राज्य सरकार को दिया दो सप्ताह का समय 

अधिकरण ने लोहिया नगर साइट पर कचरा निपटान सुविधा निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लंबित होने पर भी नाराजगी व्यक्त की। एनजीटी ने अब राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। ताकि वह डीपीआर की स्थिति और लोहया नगर साइट पर कचरा निस्तारण सुविधा के सबंध में अपनी रिपोर्ट और जवाब दखिल कर सके। इस मामले में अगली सुनवाई 13 नवम्बर को होगी। 

आरसी के बाद भी 5 करोड़ जुर्माने की वसूली नहीं 

एक चौकांने वाला खुलासा करते हुए निगम के वकील ने बताया कि यूपी प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड ने पर्यावरण मुआवजे के रूप में पांच करोड़ का जुर्माना लगाया है।लेकिन यह राशि नगर निगम द्वारा जमा नहीं की गयी है। यह भी जानकारी दी कि इस राशि की वसूली के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जा चुका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने प्रदेश सरकार को भी इस मामले में उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिया है। साथ ही मेरठ के डीएम को कार्रवाई कर जवाब देने को कहा गया है। 

42 लाख टन कूड़ा होने का दावा 

याचिकाकत्र्ता  ने आरोप लगाया कि मेरठ नगर निगम ने पिछले 13 वर्षो में उत्पन्न हुए 3,28,000मीर्टिक टन और बिना निस्तारित किए गये 42,17,500 मीर्टिक टन पुराने कूड़े का निस्तारण नहीं किया ।  कूड़े की इतनी बड़ी मात्रा उत्पन्न होने के बावजूद इसके प्रबंधन के लिए को कोई उचित व्यवस्था नहीं बनायी है। याचिका दायर होने के बाद भी नगर निगम ने पुराने कूड़े को ठीक करने और नये कूड़े के उत्पादन और उसके निस्ताण की खाई पाटने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।  इस मामले में एनजीटी ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कूड़े के पहाड़ की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने नगर आयुक्त से पूछा है कि कूड़े के पहाड़ के लिए कौन सी व्यवस्था की गयी है। भविष्य की क्या योजनाएं है। जिसमें वित्त का स्त्रोत ,जिम्मेदार प्राधिकरण ओर कार्य पूरा करने की सीमा शामिल है। 



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