देश और संस्कृति के लिए त्याग का समय आ गयाः मोहन भागवत

 इंटरनेशनल टेंपल्स कन्वेशन और एक्सपो का किया उद्घाटन

वाराणसी।
शिव की नगरी काशी में विश्व के सबसे बड़ा इंटरनेशनल टेंपल्स कन्वेशन और एक्सपो का उद्घाटन शनिवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में दुनिया भर के मंदिर प्रमुखों को मोहन भागवत ने संबोधित किया। कहा कि मंदिरों के संचालन के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि मंदिर पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक देश को एक सूत्र में पिरो सकते हैं। हर सनातनी का घर मंदिर है और इन मंदिरों को जोड़कर हम भारत को फिर से विश्वगुरू बना सकते हैं। जिसको धर्म का पालन करना है वो धर्म के लिए सजग रहेगा। निष्ठा और श्रद्धा को जागृत करना है। छोटे स्थान पर छोटे से छोटे मंदिर को समृद्ध बनाना है। समय आ गया है कि अब देश और संस्कृति के लिए त्याग करें।
संघ प्रमुख ने कहा मंदिर की व्याख्या की।  कहा कि आम जनता का दुख दूर करने वाला, विपत्ति में आसरा देने वाला, संस्कार देने वाला, शिक्षा देने वाला, उपासना और उनको परमतत्व की प्रेरणा देने वाला मंदिर होना चाहिए। सर्व समाज की चिंता करने वाला मंदिर होना चाहिए। देश के सभी मंदिरों का एकत्रीकरण समाज को जोड़ेगा, ऊपर उठाएगा, राष्ट्र को समृद्ध बनाएगा।
उन्होंने कहा कि मंदिरों को समय के साथ बदलना चाहिए और अर्चकों को प्रशिक्षण देना चाहिए। लचीला कर्मकांड भारत की विशेषता है। उसको पूरी तरह से आचरण में लाना चाहिए।
मंच से पीएम मोदी का संदेश पढ़ा गया
मंदिरों के महासम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़ा गया। पीएम मोदी ने अपने संदेश में महासम्मेलन के आयोजन के लिए शुभकामनाएं व बधाई दी। काशी समेत देश के मंदिरों के विकास और विरासत की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। पीएम ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, गंगा घाट का सुंदरीकरण देश और दुनियाभर के लिए उदाहरण है। सभी मंदिर मिलकर ही 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' का सपना साकार करेंगे।

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