बसपा की ओर से मेयर प्रत्याशी होंगे हसमत मलिक
मुस्लिम चेहरा देर रात पार्टी ने खोला प्रत्याशी का नाम, होगी कांटे की टक्कर
मेरठ। इस बार मेयर पद के चुनाव में प्रत्याशियों में कांटे की चक्कर के आसार नजर आ रहे है। बसपा ,कांग्रेेस सपा व आप ने अपने पत्ते खोल दिय है। जिसमें दो मुस्लिम, एक जाट व एकगुर्जर मेयर पद के प्रत्याशी है। सिर्फ भाजपा के पत्ते खुलना बाकी रह गया है। इस बार मेयर के पद के लिए घामासान होने के पूरे आसार दिखाई दे रहे है। मेयर के पद के जीत के लिए हार जीत को अंतर काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना यह है कि मेयर का सेहरा किसके सिर बंधता है। मंगलवार देर रात को बसपा ने अपने पत्ते खोलते हुए मेयर पद के लिए तीन बार पार्षद रहे हसमत मलिक को मैदान में उतारा है।
नगर निगम चुनाव में बसपा ने हशमत मलिक को मैदान में उतारा है। पार्टी मुस्लिम चेहरा हशमत पर भरोसा जताते हुए उसे मेयर पद का चुनाव लड़ाएगी। देर शाम लखनऊ में पार्टी हाईकमान की तरफ से हशमत अली के नाम पर मुहर लग गई। बता दें कि बसपा से जाट, गुर्जर सहित अन्य बिरादरी के भी मेयर के टिकट की रेस में थे। लेकिन पार्टी हाईकमान ने हशमत के नाम पर मोहर लगा दी है।
बसपा जिलाध्यक्ष मोहित आनंद ने बताया कि पार्टी ने हशमत मलिक को मेयर का टिकट दिया है। जल्द पार्षदों, अध्यक्ष व सदस्यों के उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी की जाएगी।बसपा से मेयर कैंडिडेट हशमत अली की पार्टी के पुराने सिपेहसालारों में गिनती होती है। बसपा के टिकट पर तीन बार वार्ड 86 से पार्षदी का चुनाव जीता। पूर्व सांसद और मेयर शाहिद अखलाक के करीबियों में भी हशमत की गिनती होती है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी ने जातीय समीकरणों के अलावा पुराने नेता के नाते हशमत को टिकट दिया है। हालांकि बीच में हशमत टिकट न मिलने से नाराजगी के कारण रालोद में चले गए थे। बाद में पार्टी में वापसी कर ली। अब पार्टी ने मेयर का टिकट भी दे दिया है।
बसपा प्रत्याशी हशमत का स्क्रैप का मुख्य कारोबार है। वहीं बसपा सरकार में पार्षद रहते हुए विवादों से भी कई बार नाम जुड़ा। मेरठ में लगभग 6 साल पहले गद्दी और मलिक बिरादरी के बीच हुए आपसी झगड़े में भी हशमत मलिक का नाम चर्चा में आया था। झगड़े में दोनों बिरादरियों के बीच गोलियां चली थी, 2 लोगों की हत्या भी हुई थी। मलिक और अब्बासी समाज के झगड़े में भी हशमत का नाम सुर्खियों में रहा था।
बता दें कि मेरठ महापौर चुनाव के लिए अब केवल भाजपा के कैंडिडेट का नाम सामने आना बाकी है। सपा ने विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को टिकट दिया है। कांग्रेस से नसीम कुरैशी, आप पार्टी से ऋचा सिंह का नाम घोषित हो चुका है। मुख्य दलों में केवल भाजपा प्रत्याशी का नाम आना बाकी है। वहीं रालोद ने भी सपा के सामने अपने सिंबल पर मेयर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि रालोद 21 अप्रैल तक प्रत्याशी घोषित कर देगी।
मुस्लिम वोट केा जलकर होगा धुर्वीकरण
बसपा ने मेयर चुनाव के लिए मुस्लिम पर दांव खेला है। कांग्रेस पहले ही मुस्लिम चेहरा नसीम कुरैशी को मैदान में उतार चुकी है। इस बार मेयर चुनाव में मुस्लिम कांग्रेस, सपा और बसपा तीनों में बंट जाएगा। सपा का मुसलमान भी सीमा प्रधान को वोट देगा। हालांकि विधायक रफीक अंसारी की पत्नी को टिकट न मिलने के कारण अंसारियों में सीमा प्रधान का खासा विरोध है। अब मेयर के पद के दलित वोट किस तरफ जाता है। इस पर संशय बना हुआ है। जिस तरह को प्रदेश में माहौल चल रहा है। उसे देखकर कर तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है। दलित वोट बसपा की ओर न खिसक जाए ।
बसपा-भाजपा का रहा मेयर सीट पर कब्जा
मेरठ मेयर सीट पर अब तक भाजपा और बसपा का कब्जा रहा है। मेयर पर कांग्रेस, सपा प्रत्याशी ने कभी जीत दर्ज नहीं कराई। निर्वतमान मेयर सुनीता वर्मा भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। भाजपा की कांता कर्दम को उन्हीं की भाजपा सरकार में हराकर मेयर बनी। हालांकि सुनीता ने बाद में सपा ज्वाइन कर ली थी। लेकिन चुनाव बसपा के टिकट पर जीता था। सुनीता से पहले भाजपा से हरिकांत अहलूवालिया, मधु गुर्जर और अरुण जैन मेयर रहे हैं। बसपा से अय्यूब अंसारी और शाहिद अखलाक भी मेयर रह चुके हैं।


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