आनंद हास्पिटल की होगी कुर्की!

अगले माह  18 मई तक कुर्की की कार्रवाई अमल में लानी जानी है

मेरठ।  गढ रोड स्थित  आनंद हास्पिटल की होगी कुर्की, के आदेश अदालत ने दिए हैं। अगले माह  18 मई तक कुर्की की कार्रवाई अमल में लानी है। कुर्की की यह कार्रवाई के आदेश सुप्रीमकोर्ट के अधिवक्ता चंद्रप्रकाश शर्मा तथा सुप्रीम कोर्ट में बतौर सहायक काम करने वाले अजीत बाली की ओर से दायर किए गए एक वाद की सुनाई के बाद अदालत ने दिए हैं। 

      न्यायालय सिविल जज (एसडी) मेरठ से उक्त आश्य के आदेश 17 अप्रैल 2023 को हुए। प्रार्थी को इसकी कापी 24 अप्रैल  को मिल चुकी है। प्रार्थी के  एक पारिवारिक मित्र ने जानकारी दी कि इससे पूर्व यह मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में भी चल रहा था। बताया गया है कि दरअसल जिस वक्त आनंद हॉस्पिटल काम चल रहा था, उसी दौरान आनंद के तत्कालीन मालिक हरिओम आनंद के आग्रह पर चंद्र प्रकाश व अजीत बाली ने एक बड़ी रकम उन्हें दी थी। इसके लिए कुछ व्यापारिक  शर्तें भी हरिओम आनंद ने मान ली थीं। इस मामले को लेकर लंबी चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने उक्त रकम की वसूली के आदेश जारी किए हैं। साथ ही आदेश के संबंध में  कार्रवाई से अगले माह यानि 18 मई को अदालत को अवगत कराने के भी आदेश दिए गए हैं। 

            अब बात आनंद हास्पिटल और हरिओम आनंद की, की जाए तो एक बड़े साम्राज्य की बर्बादी का कारण लोग आनंद के करीबियों तथा स्टाफ के कुछ लोगों को ज्यादा मानते हैं। इसके अलावा बर्बादी का बड़ा कारण नोटबंदी को भी बताया जाता है। हरिओम आनंद ने लोकप्रिय अस्पताल में विवाद के बाद 2007 में आनंद अस्पताल खड़ा किया था। शहर के नामचीन चिकित्सकों की टीम को साथ जोड़कर उस समय आनंद अस्पताल को मेरठ का सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बना दिया था। लेकिन ज्यादा दिन यह नहीं चल पाया। इससे आगे जाने की महत्वाकांक्षा में वह आत्मघाती कदम उठा गए।उन्होंने एक तरफ जहां अस्पताल की जिम्मेदारी अपने चिकित्सकों की टीम और कर्मचारियों पर छोड़ दी, तो खुद अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लग गए। इसके लिए उन्होंने शहर के कई फाइनेंसर तलाशे और उनसे पैसा लेकर जमीन खरीदनी शुरू कर दी। उनका ध्यान अस्पताल से हटा तो वहां पर गड़बड़ी शुरू हो गई। कर्मचारियों ने चांदी काटी तो चिकित्सकों की टीम ने भी अपनी मनमानी शुरू कर दी। इसमें पूरा नुकसान हरिओम आनंद को हुआ। हालात ये हो गए कि हरिओम आनंद का अस्पताल में शेयर 50 प्रतिशत से घटकर करीब तीन प्रतिशत पर आ गया।नोटबंदी के बाद पूरा मामला गड़बड़ा गया। होटल हारमनी इन के मालिक हिमांशु पुरी जब कर्ज के बोझ तले दबकर शहर से रातोंरात गायब हुए तो लोगों का ध्यान ऐसे तमाम लोगों पर गया जिन्होंने मोटा कर्ज शहर के धन्नासेठों से उठाया था। उस समय तक प्रॉपर्टी के रेट भी आधे हो चुके थे  खरीददार ही नहीं मिल रहे थे। 

            ऐसे में लेनदारों ने हरिओम आनंद पर भी तगादा शुरू कर दिया। इस देनदारी को चुकाने और अपनी साख बचाने में हरिओम आनंद ने मोटा पैसा बहुत ही ऊंची ब्याज दर पर उठाया। जिसको चुकाते चुकाते जब वह थक गए। सूत्रों की मानें तो अंतिम समय में हरिओम आंनद ने तीन रुपये सैकड़ा की दर तक पर पैसा उधार लिया था। इसका ब्याज भी वह भर रहे थे, लेकिन अस्पताल के भीतर हो रही गड़बड़ी को वह समझ नहीं पाए।आनंद अस्पताल के बराबर में जगह खरीदकर हरिओम आनंद ने वहां इमरजेंसी बनाई तो एक साइट में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कराया। इसके बाद से ही उनके अस्पताल में गड़बड़ी शुरू हो गई। आंतरिक विवादों के साथ ही तमाम विवाद शुरू हो गए। 

No comments:

Post a Comment

Popular Posts