भारतीय चिंतन में व्यक्ति नही बल्कि परिवार ही सबसे छोटी इकाई होता है

मेरठ। आजकल पूरे देश में जी 20 के सिलसिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा के अनुरूप इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।अब तक देश भर में सभी सदस्य देशों और अन्य देशों के प्रतिनिधियों के 100 से अधिक कार्यक्रम हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद द्वारा भी देश भर में इस निमित्त प्रवासी भारतीयों द्वारा "वसुधैव कुटुंबकम् " की दिशा में किए जा रहे कार्य के बारे में गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं।

इसी कड़ी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद की मेरठ इकाई द्वारा बुधवार  को एक गोष्ठी का आयोजन चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ के अटल ऑडिटोरियम में किया गया।
मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महामंत्री  श्याम परांदे  रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला द्वारा की गई। प्रो.रूपनारायण  तथा प्रो. वाई विमला  विशिष्ट अतिथि के रूप में रहे। महिला अध्ययन केंद्र की एस प्रो. बिंदु शर्मा जी सह संयोजक रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की गई। एआरएसपी मेरठ के संयोजक अनिल गुप्ता ने कहा की भारतीय चिंतन में व्यक्ति नही बल्कि परिवार ही सबसे छोटी इकाई होता है।और यहां पिंड से ब्रह्मांड तक एक सूत्र में रहने की अवधारणा की गई है। प्रो.रूपनारायण जी ने कहा की समस्त पृथ्वी एक परिवार ही है। प्रो.वाई विमला ने कहा की भारतीय होने कारण विदेशों में विशेषकर हंगरी में उन्हें विशेष सम्मान दिया गया था। मुख्य वक्ता श्री श्याम परांदे जी ने बताया कि जो भी भारत से बाहर गए, चाहे एक साल पहले गए हों, एक दशक पहले गए हों, एक शताब्दी पूर्व गए हों या एक सहस्त्राब्दी पूर्व गए हों वो सभी प्रवासी भारतीय हैं।इस संबंध में लगभग पंद्रह सौ वर्ष पूर्व गए और यूरोप के 32 देशों में फैले ढाई करोड़ रोमा लोगों का उदाहरण भी उन्होंने दिया जो स्वयं को भारतीय ही मानते हैं और भारतीय संस्कृति को जिंदा रखे हैं।उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों के दिलों में एक छोटा भारत रहता है। आज भी जब उनसे पूछते हैं तो उनको क्या चाहिए तो उनका उत्तर होता है की उन्हें कुछ नही चाहिए।केवल गंगा, काशी और अन्य तीर्थों की यात्रा की सुविधा और अपने पूर्वजों के मूल स्थान की जानकारी ही अपेक्षित रहती है।वो विभिन्न देशों में होली, दिवाली और रामलीलाएं मनाते हैं।और आवश्यकता पड़ने पर उन देशों में पूरी सेवा भी करते हैं
कुलपति प्रो संगीता शुक्ला जी ने विश्वविद्यालय को विदेशी विश्वविद्यालयों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. बिंदु शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। डा. पायल अग्रवाल ने वन्देमातरम का गान किया।तथा डा.सोनम शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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