मौजूदा दौर शिक्षा का, अपने बच्चों को दे इल्म: मौलाना चतुर्वेदी

-मुस्लिम समाज सेवा समिति की ओर से किया गया जलसा सीरत उन नबी का आयोजन
मेरठ। देश की तरक्की एक शिक्षित समाज के जरिए हो सकती है, इसलिए हमें अपने बच्चों को शिक्षित बनाने की फिक्र करनी चाहिए। इल्म के जरिए इंसानियत और मोहब्बत के पैगाम पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए। इल्म इंसानियत की तहजीब सिखाता है। उक्त बातें रविवार को आयोजित हुए जलसा सीरत उन नबी के मौके पर मौलाना मशहूद उर रहमान शाहीन जमाली चतुवेर्दी ने कहें।
गौरतलब है, मुस्लिम समाज सेवा समिति की ओर से जलसा सीरत उन नबी का आयोजन किया गया,  जिसकी सदारत कारी अनवार ने की। कारी इनायत उर रहमान की तिलावत से जलसे का आगाज हुआ। कारी हाशिम सगीर एवं मोहम्मद हुसैन ने नाते नबी खूबसूरत आवाज में पढ़कर सुनाया। जलसे में मुख्य वक्ता मौलाना मशहूद उर रहमान शाहीन जमाली चतुवेर्दी रहें। जिन्होंने इल्म पर जोर दिया। कहा, कहा, इल्म इंसानियत की तरक्की का सामान है। इल्म के जरिए समाज और देश की तरक्की का विकास होता है। हमें अपने बच्चों को कुरान की तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी सिखानी चाहिए, क्योंकि मौजूदा दौर शिक्षा का दौर है। जिसके बिना जिंदगी गुजारना मुश्किल है। इल्म हासिल करना जितना जरूरी लड़कों के लिए हैं, उतना ही जरूरी अपनी बच्चियों को इल्म सिखाना है। इल्म के जरिए से इंसान अपनी जिंदगी को बेहतर रास्ते पर ले जा सकता है। कहा, इल्म इंसानियत से मोहब्बत सिखाता है। इल्म जिंदगी जीने का सलीका सिखाता है। इल्म ऊंच, नीच, जाति, बिरादरी की दीवारों से ऊपर उठकर एक दूसरे के सम्मान और एक दूसरे के जज्बात की कद्र करना सिखाता है। इल्म आपसी सद्भाव के साथ जिंदगी गुजारने का सलीका सिखाता है।
मुहम्मद ने दिया इंसानियत का पैगाम: मौलाना राशिद
मौलाना राशिद ने कहा, मोहम्मद साहब का पैगाम इंसानियत की तरक्की के लिए और समाज सुधार के लिए था। मोहम्मद साहब ने दुनिया के हर मजहब के इंसान को मोहब्बत का पैगाम दिया। तालीम का मकसद इंसानियत की तरक्की और अल्लाह के बंदों से प्यार करना है।
इनका रहा सहयोग
मंच का संचालन कारी अमजद ने किया। कार्यक्रम की सरपरस्ती मौलाना मोहम्मद उमर ने की। अंत में कारी मोहम्मद अनवार साहब ने मुल्क की तरक्की और इंसानियत से मोहब्बत की दुआ कराई। मुस्लिम समाज सेवा समिति के सभी सदस्यों ने आए हुए मेहमानों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर अखलाक सैफी, असद उल्ला खान, अब्दुल सत्तार, मोहम्मद साजिद, हाजी खुश नवाज अंसारी, दिलशाद सैफी रहे।

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