पशुपालन विभाग में दवा खरीद में हेराफेरी का मामला

 सीएम योगी गंभीर, दो वरिष्ठ अफसरों को सौंपी जांच

लखनऊ।
बेजुबानों की दवा और अन्य सामग्री खरीदने में भ्रष्टाचार की अब उच्च स्तरीय जांच होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पशुपालन विभाग में धांधली को गंभीरता से लिया है और दो वरिष्ठ आइएएस अफसरों को जांच सौंपी है। कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह व अपर मुख्य सचिव कृषि व कार्मिक देवेश चतुर्वेदी से सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है।
गौरतलब है कि पशु रोग नियंत्रण के अफसरों ने 60 करोड़ सरकारी धन को लूटने के लिए पशुओं की घटिया दवा और अस्पतालों की सामग्री मुंहमांगे दामों पर खरीदी। जम्मू-कश्मीर व उत्तराखंड की दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियां कटघरे में हैं, क्योंकि राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश ने जांच में इन्हें अधोमानक यानी घटिया पाया है।
संबंधित कंपनियों से दो वर्ष के लिए व्यापार पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और बची दवाएं वापस लेने के आदेश जून माह में जारी हो चुके हैं। यह भी अल्टीमेटम दिया गया था कि दवाओं की आपूर्ति में जितनी धनराशि कंपनियों ने ली है वह वापस लौटाएं अन्यथा भू-राजस्व की तरह वसूली की जाएगी।
एनएडीसीपी योजना के तहत सामग्रियों की खरीद में हर कदम पर खामियां सामने आ गई हैं। जिला स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली सामग्रियों की आपूर्ति मुख्यालय पशुपालन विभाग पर 26 जुलाई से 26 अगस्त 2021 तक कराई गई। ये सामग्री जिलों को आठ माह बाद 22 मार्च 2022 तक भेजी गई्, इससे अतिरिक्त खर्च हुआ।
इसमें आपूर्ति करने वाली मेसर्स जगदीश इंटरप्राइजेज व मेसर्स अभिनीश ट्रेडर्स की संलिप्तता की भी जांच करने के निर्देश हुए हैं। पशु चिकित्सालयों के लिए सामग्री खरीदने में भी करोड़ों की हेराफेरी हुई है। खरीद के लिए जिलों से मांगपत्र संबंधी कोई अभिलेख पत्रावली में नहीं है।
सरकारी धन लूटने की जल्दबाजी में अफसरों ने एक के बाद एक कई गड़बड़ियां की हैं। विभाग ने एक्टिव कोल्ड बाक्सेस 1,27,770 रुपये प्रति नग की दर से खरीदा। इसी अवधि में मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग ने इन्हीं बाक्सेस को 47,250 व 49,500 रुपये में खरीदा, जबकि जम्मू-कश्मीर में 59,000 प्रति नग की दर से खरीदा गया। आर्डर जेम पोर्टल से किया गया और भुगतान मैनुअल हुआ।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. रजनीश दुबे ने खरीद में गड़बड़ी स्वीकारी है। ये खरीद पूर्व निदेशक डा. आरपी सिंह व डा. इंद्रमणि के कार्यकाल हुई है और जेम बायर डा. जेपी वर्मा रहे हैं। डा. इंद्रमणि इन दिनों निदेशक प्रशासन पशुपालन हैं। इसकी विस्तृत जांच विशेष सचिव समन्वय विभाग रामसहाय यादव को सौंप चुके हैं।

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