बहुत कुछ सिखाया है
तूने ऐ दोस्त
खुद को ढूंढा है तुझसे ही
दोस्त मेरा सच्चा साथी
मेरा अपना अकेलापन।
सफर जिंदगी का कांटो भरा है
कितने ही मोड़ों ने
मुझको तोड़ा है
मुझको संभाला तूने ए दोस्त
मेरा अपना अकेलापन।
जब भी खुद से खफ़ा हुआ
मैं हुआ उदास,
रोया या घबराया मैं
जीना सिखाया है तूने ए दोस्त
मेरा अपना अकेलापन।
गम छुपाए थे
दिल के कोने में
सब कुछ तुझे ही सुनाए है
मैने ताने जिंदगी के
सुलझाए तूने ए दोस्त
मेरा अपना अकेलापन।
उत्सुकता दिखाता
जमाना देखा है
लिए प्रश्न जमाना
स्वभाविक खड़ा है
जिम्मेदार कैसे बनाया
तूने ए दोस्त
मेरा अपना अकेलापन।
आनंद लेता रचनाओं में
खोज पर चल देता
सरहदों पार तक मैं
देखूं गरिमा शिखर रास्ते संग
मेरा अपना अकेलापन।
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- गरिमा खंडेलवाल
कवयित्री व स्वतन्त्र लेखिका, उदयपुर (राजस्थान)

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