मुजफ्फरनगर। 9 नवम्बर 2021मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है।छह माह तक बच्चों को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। उसके बाद ऊपरी आहार शिशु के लिएआवश्यक है। इससे मानसिक स्वास्थ्य,तंत्रिका तंत्र और शारीरिक क्षमता का विकास होता है। इसकी जानकारी आजमंगलवार को जनपद के सभी आगंनबाड़ी केंद्रों पर माताओं को दी गई तथा शिशुओं को खीरखिलाई और उनकी माताओं को शिशु को आगे से ऊपरी आहार में दिए जाने वाले खाद्यपदार्थों की जानकारी भी दी गई।जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गौड़ ने बताया-कि मंगलवार को जनपद में सभी 2270 आगंनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजनकिया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों के अभिभावक एवं ग्रामीणों सहित आंगनबाड़ी सेविकाव सहायिका मौजूद रहीं। उन्होंने बताया- कि शिशुओं के वजन, लंबाई, तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों मेंसंरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास हेतु पौष्टिक व पूरकआहार की आवश्यकता होती है। इसलिए 6 छह माह के बाद शिशुओं के लिएको स्तनपान के साथअनुपूरक आहार देना चाहिए। 6 छह माह से 8 आठ माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल-चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस, खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन तीन भरेहुए चम्मच दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 नौ माह से 11 माहतक के बच्चों को प्रतिदिन तीन3 से 4 चार बार एवं 12 माह से 2 दो वर्ष की अवधि मेंघर पर पका पूरा खाना एवं धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नाश्ते मेंदेना चाहिए। इन सब चीजों की जानकारी आज माताओं को दी गई। कब और कैसे करें अन्नप्राशन जब बालक 6-7 महीने का हो जाता है और पाचनशक्तिप्रबल होने लगती है तब यह संस्कार किया जाता है। शास्त्रों में अन्न को ही जीवन काप्राण बताया गया है। ऐसे में शिशु के लिए इस संस्कार का अधिक महत्व होता है। शिशुको ऐसा अन्न दिया जाना चाहिए जो उसे पचाने में आसानी हो साथ ही भोजन पौष्टिक भीहो।अन्नप्राशन के महत्व को समझेंछह महीने की आयु में शिशु का खाने के प्रतिरुझान बढ़ाने को हम अन्नप्राशन करना कहते हैं। यह केवल रस्म नहीं है, इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। इससेबच्चे का स्वाद विकसित होता है
अन्नप्राशन दिवस पर माताओं को मिली पोषक आहारकी जानकारी
By News Prahari -
मुजफ्फरनगर। 9 नवम्बर 2021मां का दूध बच्चों के लिए अमृत समान होता है।छह माह तक बच्चों को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। उसके बाद ऊपरी आहार शिशु के लिएआवश्यक है। इससे मानसिक स्वास्थ्य,तंत्रिका तंत्र और शारीरिक क्षमता का विकास होता है। इसकी जानकारी आजमंगलवार को जनपद के सभी आगंनबाड़ी केंद्रों पर माताओं को दी गई तथा शिशुओं को खीरखिलाई और उनकी माताओं को शिशु को आगे से ऊपरी आहार में दिए जाने वाले खाद्यपदार्थों की जानकारी भी दी गई।जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गौड़ ने बताया-कि मंगलवार को जनपद में सभी 2270 आगंनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस का आयोजनकिया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों के अभिभावक एवं ग्रामीणों सहित आंगनबाड़ी सेविकाव सहायिका मौजूद रहीं। उन्होंने बताया- कि शिशुओं के वजन, लंबाई, तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों मेंसंरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टिकोण से बहुत तेजी से विकास हेतु पौष्टिक व पूरकआहार की आवश्यकता होती है। इसलिए 6 छह माह के बाद शिशुओं के लिएको स्तनपान के साथअनुपूरक आहार देना चाहिए। 6 छह माह से 8 आठ माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल-चावल, दाल में रोटी मसलकर अर्ध ठोस, खूब मसले साग एवं फल प्रतिदिन तीन भरेहुए चम्मच दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 नौ माह से 11 माहतक के बच्चों को प्रतिदिन तीन3 से 4 चार बार एवं 12 माह से 2 दो वर्ष की अवधि मेंघर पर पका पूरा खाना एवं धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नाश्ते मेंदेना चाहिए। इन सब चीजों की जानकारी आज माताओं को दी गई। कब और कैसे करें अन्नप्राशन जब बालक 6-7 महीने का हो जाता है और पाचनशक्तिप्रबल होने लगती है तब यह संस्कार किया जाता है। शास्त्रों में अन्न को ही जीवन काप्राण बताया गया है। ऐसे में शिशु के लिए इस संस्कार का अधिक महत्व होता है। शिशुको ऐसा अन्न दिया जाना चाहिए जो उसे पचाने में आसानी हो साथ ही भोजन पौष्टिक भीहो।अन्नप्राशन के महत्व को समझेंछह महीने की आयु में शिशु का खाने के प्रतिरुझान बढ़ाने को हम अन्नप्राशन करना कहते हैं। यह केवल रस्म नहीं है, इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। इससेबच्चे का स्वाद विकसित होता है
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