जब धड़कने लगे
जोरों से दिल तेरा
जब बुलाएँ मस्त फ़िज़ाएँ
छा जाए रंगीनियाँ
क़ुदरत की रानाई पर
हवाओं में जब
छाने लगे मदहोशियाँ
भँवरे भी करने लगें
गुन गुन का गान
गुलों पर छाए ख़ुमार
जब लगने लगें
अपने भी पराए तुम्हें
खो बैठो क़रार-ए-दिल
लगने लगे बेबस सी
ज़िन्दगी तुम्हें अपनी
याद रखना, चाहता है



कोई शिद्दत से तुमको
गहराइयों से दिल की
कर रहा है इंतज़ार
बेसब्री से तुम्हारा
कोई बोझ न लेना
दिल पर तब अपने
पूछने को फ़क़त
ख़ैरियत ही इस
दीवानी की अपनी
बस इल्तज़ा है तुमसे
चले आना तुम
इक बार फिर से
लगा लूँगी दिल से तुम्हें
भुलाकर तमाम
ग़लतियां भी तुम्हारी
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- नीलोफ़र
देहरादून (उत्तराखंड)।

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