प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता के भरोसेमंद नायक बन गए हैं। अब यह नारा हकीकत बन गया है कि 'मोदी हैं तो मुमकिन है'। विश्व के राजनेताओं की 'ग्लोबल रैंकिंग' में भी मोदी ने अपना जलवा कायम कर रखा है। सवाल उठता है कि आखिर अवाम उन पर इतना अटूट भरोसा क्यों करता है। तमाम असफलताओं के बाद भी मोदी वैश्विक मंच पर सफल राजनेता क्यों है। क्या इसके पीछे हिंदुत्व की छबि काम करती है? या उनके साहसिक निर्णय जो दूसरी सरकारें चाहकर भी समय रहते नहीं ले पायीं। संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की तमाम लामबंदी के बाद भी वह दुनिया और देश के सबसे भरोसेमंद राजनेता बने हैं।
गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी पर गोधरा दंगे जैसा दाग लगा। फिर भी वह कैसे इतने लोकप्रिय राजनेता बन गए। देश की जनता उस पर अटूट भरोसा और विश्वास करती है। विकास का गुजरात मॉडल 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता के सिर चढ़कर बोला, जिसका नतीजा रहा कि चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन गया। स्वाधीन भारत के राजनीतिक इतिहास में 50 साल से अधिक सत्ता पर काबिज रहने वाली कांग्रेस सत्ता से बेदखल हो गईं। कांग्रेस को घमंड था कि उसकी सत्ता जाने वाली नहीं है, लेकिन अब उसका राजनीतिक इतिहास मिटने वाला है, क्योंकि उसने समय के साथ खुद को नहीं बदला। देश को भरोसे लायक नेतृत्व नहीं दिया।
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वड़नगर में हुआ था। पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था। माता का नाम हीराबेन है। नरेंद्र मोदी पांच भाई बहन हैं। वड़नगर रेलवे स्टेशन पर मोदी के पिता की चाय की दुकान थी। दुकान पर मोदी पिता का सहयोग करने के लिए जाया करते थे और रेलवे यात्रियों को चाय पिलाया करते थे। लोकसभा चुनाव में 'चाय वाला' स्लोगन आगे कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका खूब फायदा उठाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्कूली दिनों में एक सामान्य छात्र थे, लेकिन सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना उनके जीवन की दिनचर्या रहीं। बड़नगर के भागवत आचार्य नारायणआचार्य स्कूल में पढ़ते थे। स्कूल में आयोजित होने वाली वाद-विवाद प्रतियोगिता, नाटक और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी हिस्सेदारी निभाते थे। बचपन से ही वे साहसी रहे। कहा जाता है कि बचपन में अपने बगल के तालाब से घड़ियाल पकड़ कर घर लाए थे। मां की डांट पड़ने पर उसे ले जाकर तालाब में छोड़ा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रधानमंत्री मोदी का बचपन से जुड़ाव रहा। बचपन में उन्हें बाल स्वयंसेवक संघ की शपथ दिलाई गई थी। संघ के बड़े-बड़े आयोजनों में वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे और प्रबंधन का कार्य भी देखते थे। विवाह के बाद नरेंद्र मोदी घर छोड़कर आरएसएस के प्रचारक बन गए। कहा जाता है कि उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था तो शंकरसिंह वाघेला ने उन्हें स्कूटर चलाना सिखाया था। इमरजेंसी के दौरान मोदी सरदार के भेष में पुलिस को खूब छकाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाफ कुर्ता और दाढ़ी आज युवाओं का शगल बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद से बेहद प्रभावित रहे। विवेकानंद पर उनका अध्ययन काफी गहरा है। उन्होंने गुजरात में विवेकानंद युवा विकास यात्रा भी निकाली थी। हिंदुत्व उनके भीतर कूट-कूट कर भरा है। हिंदुत्व की वजह से ही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने हैं। यही वजह है कि देश की जनता अपने से उनपर भरोसा करती है। रात में बेहद कम नींद लेते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते हैं। योग और अध्यात्म से गहरा लगाव है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यात्राएं बेहद पसंद हैं। उन्होंने कई देशों की यात्राएं की हैं। अपने कूटनीतिक की वजह से विदेशों से काफी अच्छे संबंध बनाए। जिन देशों से भारत के संबंध अच्छे नहीं थे उनसे भी मित्रता स्थापित किया। लेकिन चीन और नेपाल को लेकर धोखा खा गए। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से भी उन्होंने संबंध सुधारने चाहे, लेकिन वह अपनी आदत से बाज नहीं आया। आज दुनिया के शक्तिशाली देशों में भारत की पहचान एक नयी शक्ति के रूप में हो रही है।
भारत की अहमियत को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक महींने के लिए अस्थाई नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी। मोदी को पतंगबाजी का अच्छा शौक है। जिसका उपयोग उन्होंने विपक्ष के पतंग की डोर काटने में किया। सोशलमीडिया पर वह बेहद एक्टिव रहते हैं। फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके पास काफी संख्या में फालोवर्स हैं। रेडियो और टेलीविजन पर 'मन की बात' सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम है। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सोशल मीडिया का जमकर उपयोग किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने शासनकाल की कई बेमिसाल उपलब्धियां भी हैं। हालांकि इस तरह के फैसले राजनीतिक आलोचनाओं के शिकार भी हुए और अर्थव्यवस्था को काफी बड़ा नुकसान हुआ। जिसमें काले धन की समाप्ति के लिए नोटबंदी का ऐलान मुख्य है। नोटबंदी इसके बाद कोरोना संक्रमण देश की आर्थिक विकास की रीढ़ तोड़ कर रख दिया। लॉकडाउन में प्रवासियों के पलायन को लेकर सरकार हाशिए पर रही। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी को लेकर भी आलोचनाएं झेलनी पड़ी। विवादित किसान बिल भी समस्या बन गया है।
बेरोजगारी और महंगाई को भी नियंत्रण करने में सरकार कमयाब नहीं हुई। देश के सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों पर बेचना भी एक खास मसला है। सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी लोगों ने हमला बोला। डीजल और पेट्रोल के साथ खाद्य तेलों एवं रसोई गैस की आसमान छूती कीमतों पर भी सरकार की चुप्पी जनता पर भारी पड़ी। दलित एक्ट एवं आरक्षण जैसे वोट बैंक के फैसलों को लेकर भी लोग आहत हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की विपक्ष आलोचना भले करता रहा, लेकिन कुछ राष्ट्रीयहितों के फैसलों को लेकर उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी। भारतीय संविधान के सबसे विवादास्पद कानून धारा 370 का खात्मा कर उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर सबसे अच्छी राजनीतिक बढ़त ली। एनआरसी और तीन तलाक के फैसले पर भी देश सरकार के साथ खड़ा रहा। पठानकोट हमले के बाद 'सर्जिकल स्ट्राइक' के जरिए देश के भरोसे को वह जीतने में कामयाब रहे। गलवान घाटी के मुद्दे पर भी सरकार जनता का भरोसा जीतने में कामयाब रही। सैनिकों के अदम्य साहस के आगे चीन को पीठ दिखाकर भागना पड़ा।
(स्वतंत्र लेखक और पत्रकार)




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