मेरठ। आज मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। कलाम ने अर्श से फर्श तक का सफर तय करने के लिए काफी मेहनत की और कई मुश्किलों का डटकर सामना भी किया। उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था।इस मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन एडवोकेट अब्दुल वहाब ने आयोजित किया। जिसमें मेरठ बार एसोसिएशन के अधिक्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। 
कार्यक्रम वेबिनार के माध्यम से आयोजित किया गया। इस मौके पर डा0 कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और वक्ताओं ने डा0एपीजे अब्दुल कलाम को याद करते हुए उनके जीवन से जुड़ी चीजों पर प्रकाश डाला। एडवोकेट अब्दुल वहाब ने कहा कि आज देश के महान व्यक्ति और राजनेता रहे अब्दुल कलाम को पूरा देश याद कर रहा है। आज आम लोगों से लेकर कई नामी हस्तियां कलाम की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं। उन्होंने उनके कुछ सुने-अनसुने किस्सों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बुद्धि, ज्ञान और सरलता के प्रतीक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को हम श्रद्धांजलि देते हैं।  वे ऐसे जनवादी राष्ट्रपति बने, जिन्होंने विज्ञान से लेकर राजनीति तक कई क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी। ज्ञान के लिए उनकी अथक खोज आत्मनिर्भर भारत के विचार को प्रेरित करने और पकड़ने के लिए जारी है।”
उनका मानना था कि आर्थिक उदारीकरण के बाद देश विज़न 2020 के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। डॉक्टर कलाम का कहना था कि देश के लक्ष्य हासिल करने के बाद रुकना नहीं चाहिए बल्कि और बेहतरी के लिए सतत प्रयास करते रहना चाहिए। उनका कहना था, "हमेशा के लिए हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि कैसे हम लोगों की ज़िंदगियों को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहें। वो केवल युवा हैं जिनमें ज्ञान और कौशल तो है ही, साथ ही कुछ हासिल करने का जज़्बा भी है, उन्हें आगे नए लक्ष्यों की तरफ बढ़ना चाहिए।" कलाम कहते थे ये कभी मत सोचो कि आप अकेले अपने देश के लिए कुछ नहीं कर सकते। आप जिस भी क्षेत्र में काम कर रहे हों आप अपनी काबिलियत बढ़ाएं। सभी की कोशिशों से ही भारत विकसित देश बन सकता है।" इस दौरान अन्य ​वक्ताओं ने भी मिसालइ मैन और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति कलाम के बारे में अपने विचार रखे।

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