बच्चे के दुःख में भी सुख ढूंढती है मां आंसू में भी हंसी, ढूंढती है मां थके हारे को सहारा देती है मां दुःख की घड़ी में भी सुख ढूंढती है मां।।
सभी को चैन देती है मां, प्रेम की मूरत है मां,
ममता की सूरत है मां, दुःख के हर लम्हे को अपने में समाती है मां।। पता नहीं बच्चों की खातिर क्या-क्या सपने बुनती है मां घर-परिवार की धुरी होती है मां जब भी घर आओ पहला सवाल बच्चे का कहां है मां।।
रोते वक्त की आवाज है मां अकेलेपन में याद आती है मां।। - रामचन्द्र नौटियाल उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
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