कानपुर । चार साल के लंबे इंतजार के बाद रविवार की सुबह राष्ट्रपति पैतृक गांव परौंख पहुंच तो ग्रामीणों की खुशी दोगुनी हो गई। गांव में पथरी देवी मंदिर में पूजन के बाद राष्ट्रपति ने गांव वासियों से मिलकर संबोधन में अपना प्यार और यादें बयां कीं।
परौंख गांव में कार्यक्रम में मुख्‍यमंत्री के बाद राष्‍ट्रपति ने संबोधन शुरू किया। उन्‍होंने कहा कि मेरे आगमन पर आप जितने खुश हैं उससे ज्यादा कहीं खुशी मुझे है। गांव आकर उन्हें बहुत ही अच्छा महसूस हुआ। लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्‍वागत किया, यह देखकर मैं आहलादित हूं। हेलीकाप्टर से उतरने के बाद मैंने सबसे पहले अपनी जन्मभूमि को चरण स्पर्श किया। इस बार काफी विलंब से गांव आना हुआ। कामना करता हूं कि आगे से ऐसा न हो। गांव आकर सबसे पहले पथरी देवी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का सौभाग्य भी मुझे मिला।
मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने वादा किया है कि जल्‍द ही यहां पर बाबा साहब की भव्य संगमरमर की प्रतिमा बनवाई जाएगी। इसके बाद मैं अपने पुश्तैनी मकान गया, जिसे मिलन केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। मुझे संतोष है कि केंद्र सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि वह जहां तक पहुंचे हैं, उसके लिए गांव की मिट्टी का आशीर्वाद है, यह मेरी जन्मभूमि नहीं, बल्कि प्रेरणा स्थल है। उन्होंने कहा कि मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं। मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही।
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