LLRM प्रिंसिपल ने की निलंबन की संस्तुति
मेरठ। जिले के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में गाजियाबाद निवासी कोविड पेशेंट की मौत के बाद मरीज को 15 दिन तक जिंदा बताकर उसके परिजनों को गुमराह करने वाले छह स्वास्थ्य कर्मियों पर विभागीय गाज गिरी है। जांच के दौरान छह स्वास्थ्यकर्मियों के दोषी पाए जाने पर मेडिकल के प्राचार्य शासन को पत्र लिखते हुए सभी स्वास्थ्यकर्मियों के निलंबन और सेवा समाप्ति की संस्तुति की है। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज के स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ है।
बताते चलें कि गाजियाबाद निवासी संतोष कुमार को 21 अप्रैल को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां 23 अप्रैल को संतोष की मौत हो गई। मगर मेडिकल के कोविड वार्ड का स्टाफ संतोष की बेटी शिखा शिवांगी को उनके पिता के स्वस्थ होने की जानकारी देकर 15 दिन तक गुमराह करता रहा। उधर संतोष की मौत के तीन दिन बाद शव को लावारिस जानकर पुलिस ने संतोष का अंतिम संस्कार भी कर दिया।

मामले का खुलासा होने पर मेडिकल के प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने इस मामले में जांच बिठाई थी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि जांच समिति में शामिल डॉ ज्ञानेश्वर टॉक, डॉक्टर धीरज बालियान और डॉक्टर केएन तिवारी ने देर शाम उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें मेडिकल के तीन डॉक्टरों और छह स्टाफ नर्स को इस मामले में दोषी पाया गया है। जिसके बाद इन सभी कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और सेवा समाप्ति की कार्यवाही के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। उधर, प्राचार्य के इस निर्णय के बाद मेडिकल कॉलेज के स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ है।
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