नई पहल, आज से जिले में डाकिए पहुंचाएंगे टीबी मरीजों के सैम्पल

- वर्ष 2019 में प्रदेश में करीब 4.86 लाख मरीज चिन्हित, वर्ष 2018 के मुकाबले 19 फीसद अधिक
- फरवरी 2019 के मुकाबले इस साल सीबीनाट मशीन से करीब 22 हजार अधिक सैम्पल की जाँच
- टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत करीब 112 करोड़ का भुगतान
- करीब 77 फीसद टीबी मरीजों की हुई एचआईवी जाँच, जो पिछले साल के मुकाबले 11 फीसद अधिक
न्यूज़ प्रहरी, मुजफ्फरनगर। देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) के पूरी तरह से खात्मे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को तय समय सीमा से पहले पूरा करने के लिए प्रदेश में चलाये जा रहे कार्यक्रमों और योजनाओं को धार देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है । इसी क्रम में टीबी मरीजों के सैम्पल की जल्द से जल्द बेहतर जाँच कराने के लिए राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में मंगलवार को विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) पर करार होने जा रहा है । इसके तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैम्पल लैब तक पहुँचाने का काम डाकिये करेंगे । इससे पहले यह सैम्पल कोरियर से भेजे जाते थे, जिससे उसमें अधिक समय लगता था । पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ समेत प्रदेश के पांच जिलों में पहले चरण में यह कार्यक्रम नौ महीने पहले चलाया गया था । उसमें सफलता मिलने के बाद विभाग अब यह बड़ा कदम उठाने जा रहा है ।राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता का कहना है कि टीबी मरीजों के मामले में सबसे बडी चुनौती जल्दी से जल्दी जाँच कराने की होती है क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है । इसी को देखते हुए डाक विभाग से करार किया गया है कि वह प्रदेश के करीब 2300 अधिकृत टीबी जाँच केन्द्रों से 24 घंटे के अन्दर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैम्पल पहुँचाने का काम करेगा । इसके साथ ही 142 सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के छह जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ व वाराणसी) में स्थित ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे के अन्दर सैम्पल पहुँचाने का काम करेगा । इससे जहाँ समय की बचत होगी वहीँ अनजाने में किसी को टीबी जैसी बीमारी की जद में आने से बचाया भी जा सकेगा । इसके साथ ही गोरखपुर में भी जल्द से जल्द ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर खोलने की तैयारी है । प्रयागराज, कानपुर, इटावा और झाँसी में भी इस तरह के सेंटर शुरू करने पर काम चल रहा है । इससे मरीजों को चिन्हित करने में और समय बचेगा और उनका इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकेगा ।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि विश्व के कुल टीबी रोगियों में करीब 20 फीसद भारत के हैं और भारत के कुल टीबी रोगियों में से करीब 27 फीसद उत्तर प्रदेश के हैं । इस बडी चुनौती का सामना करने के लिए प्रदेश पूरी तरह से कमर कस चुका है । इसमें डाक विभाग के अलावा पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार व श्रम विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है । इसके अलावा मिशन हेल्थ कार्यक्रमों व अन्य कार्यक्रमों के जरिये जागरूकता पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है ।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि वर्ष 2019 में प्रदेश में करीब 4.86 लाख मरीजों को चिन्हित कर इलाज शुरू किया गया जो कि वर्ष 2018 के मुकाबले करीब 19 फीसद अधिक है । ऐसे मरीजों की खोज के लिए समय-समय पर पूरे प्रदेश में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाये गए, जिनको यह पता ही नहीं होता कि वह टीबी से ग्रसित हैं । इन अभियानों के जरिये हर बार औसतन करीब 7000 टीबी रोगी खोजे गए, जिनका जल्द से जल्द इलाज शुरू किया गया । सभी टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए इलाज के दौरान प्रतिमाह 500 रूपये दिए जाने की व्यवस्था की गयी है , जिसके तहत करीब 112 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है । टीबी मरीजों के एचआईवी ग्रसित होने की अधिक सम्भावना होती है, जिसे देखते हुए वर्ष 2019 में करीब 77 फीसद मरीजों की एचआईवी जाँच कराई गयी जो कि पिछले साल के मुकाबले करीब 11 फीसद अधिक है ।

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