कोरोना वायरस से बचना है तो बनाए रखे सामाजिक दूरी - डीएम

० आपकी लापरवाही आपके लिए तो गलत है ही, किसी दूसरे पर भी भारी पड़ सकती है
न्यूज प्रहरी-मेरठ । प्रधानमंत्री की अपील पर जनता कफ्र्यू की कामयाबी देखने लायक थी, सहयोग के लिए लोगों की खूब सराहना भी हुई। लेकिन लॉक डाउन को लेकर लोग उतने गंभीर नजर नहीं आए। प्रधानमंत्री ने न केवल टवीट कर लोगों के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जाहिर की बल्कि उन्हें राज्य सरकारों से नियम-कानूनों का पालन कराने का निवेदन भी करना पड़ा। देखने में आया कि लोग सुबह से ही इधर-ऊधर घूम रहे थे। प्रशासन की ओर से अति आवश्यक कार्य के लिए निकलने देने की छूट का लोगों ने बेजा दुरूपयोग किया। लेकिन कोरोना के लगातार बढ रहे प्रकोप को देखते हुए यह कहना मुश्किल होगा कि प्रशासन कब तक अति आवश्यक कार्यों के नाम में घर से बाहर निकलने की छूट दे पाएगा। आम जन को कोरोना वायरस से बचाने के लिये मंगवार से प्रशासन व पुलिस की ओर से सख्ती बरती जा रही है।
जिला अधिकारी अनिल ढीगरा ने कहा लोग छूट का दुरूपयोग कतई न करें। ऐसा करने से जरूरी सामाजिक दूरी नहीं बन पाएगी और हम कोरोना को नहीं हर पाएंगे। शहर की जनता वस्तु स्थिति को समझें और जहां तक संभव हो, अपने घरों के अंदर ही रहें।दरअसल कोरोना वायरस का संक्रमण पता लगने में समय लगता है और कई बार मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति पर इसका असर पता ही नहीं चलता, ऐसे लोग अनजाने में ही कोरोना कैरियर बन सकते हैं। ऐसी गलती कतई न करें। आपकी लापरवाही आपके लिए तो गलत है ही, किसी दूसरे पर भी भारी पड़ सकती है।
सीएमओ डा राजकुमार चौधरी का कहना है कि सामाजिक दूरी ही कोरोना से जंग लडने का सबसे बेहतर उपाय है जो हमारा बचाव कर सकती है। उन्होने लोगों से अपील की है लोग अपने घरों में ही रहें। कालोनी के पार्क में जाना भी खतरनाक हो सकता है। किसी भी सार्वजनिक स्थान पर लोगों के संपर्क में आने की आशंका बनी रहती है। कब किसके घर में कौन मेहमान, कहां से आया होगा, कहा नहीं जा सकता। इसलिए अपने पड़ोसियों से भी सामाजिक दूरी बनाकर रखें। बेशक आपकी जानकारी के हिसाब से आपके पड़ोसी स्वस्थ्य हों और वे ऐसे किसी संवेदनशील स्थान पर भी न गए हों। जरा सी चूक न केवल आपको विपत्ति में लाकर खड़ा कर सकती है बल्कि आपकी पूरी सोसायटी को खतरे में डाल सकती है।
उन्होने लोगों को सलाह दी है कि लोग जहां हैं, वहीं घरों के अंदर रहें। पैत्रक स्थान पर जाने की कोशिश न करें। जो लोग महानगरों से अपने गांव और कस्बों में चले गए हैं, वे भी अपने घरों में ही बंद रहें तो बेहतर है, ऐसी आशंका इसलिए भी बनी रहती है क्योंकि कि महानगरों में रहने के दौरान वे किस-किसके संपर्क में आए होंगे, उन्हें खुद भी नहीं पता।

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