AI और डिजिटल फाइनेंस पर CCSU में वैश्विक मंथन, भारत-ब्राजील के नियामक दृष्टिकोण पर हुई चर्चा
ब्राजील के विशेषज्ञ ने कहा—तकनीकी नवाचार के साथ मानवाधिकार, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही भी जरूरी
मेरठ, 2 सितंबर 2026। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विधि अध्ययन संस्थान की ओर से “ग्लोबल रेगुलेटरी लैंडस्केप–आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस एंड डिजिटल फाइनेंस: ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के तहत ब्राजीलियाई दृष्टिकोण” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ब्राजील के इटियूना विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) डेलटिन रिबेरो ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल फाइनेंस और बदलते वैश्विक नियामक ढांचे पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने प्रो. डेलटिन रिबेरो के परिचय से की। उन्होंने प्रो. रिबेरो की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक यात्रा और संवैधानिक विधि, तकनीक एवं विधि तथा मौलिक अधिकारों के क्षेत्र में उनके शोध एवं प्रकाशनों पर प्रकाश डाला।
AI ने बदला डिजिटल फाइनेंस का स्वरूप
विशेष व्याख्यान में प्रो. रिबेरो ने कहा कि AI ने डिजिटल भुगतान, ऋण वितरण, क्रेडिट स्कोरिंग, बीमा, धोखाधड़ी का पता लगाने, निवेश सेवाओं और ग्राहक सेवाओं के स्वरूप में तेजी से बदलाव किया है। AI उन लोगों और छोटे व्यवसायों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिनके पास पारंपरिक क्रेडिट इतिहास उपलब्ध नहीं है।
हालांकि उन्होंने AI के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर भी आगाह किया। इनमें भेदभावपूर्ण निर्णय, अत्यधिक डेटा संग्रह, पारदर्शिता की कमी, साइबर सुरक्षा के खतरे, डीपफेक आधारित धोखाधड़ी और बाहरी तकनीकी प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता प्रमुख हैं।
भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI नियमन पर चर्चा
व्याख्यान में भारत को तुलनात्मक अध्ययन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। देश के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फिनटेक इकोसिस्टम के संदर्भ में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम-2025, RBI के डिजिटल लेंडिंग निर्देश-2025, RBI के FREE-AI फ्रेमवर्क और इंडिया AI गवर्नेंस गाइडलाइंस पर चर्चा की गई।
वक्ताओं ने लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स और बाहरी AI विक्रेताओं की गतिविधियों के लिए विनियमित वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही पर भी जोर दिया।
यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के नियामक मॉडल भी समझाए
प्रो. रिबेरो ने यूरोपीय संघ के AI Act, General Data Protection Regulation (GDPR), Digital Operational Resilience Act (DORA) और Markets in Crypto-Assets Regulation (MiCA) के माध्यम से यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण को समझाया।
उन्होंने बताया कि यूरोपीय नियामक ढांचा जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है और व्यक्तियों की क्रेडिट योग्यता के आकलन में इस्तेमाल होने वाली कुछ AI प्रणालियों को उच्च जोखिम वाली प्रणालियों की श्रेणी में रखता है।
कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर में हो रहे नियामक विकासों के साथ OECD, UNESCO, Council of Europe और Bank for International Settlements (BIS) द्वारा विकसित अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर भी चर्चा हुई।
ब्राजील के दो ड्राफ्ट बिलों का तुलनात्मक अध्ययन
ब्राजील के संदर्भ में ड्राफ्ट बिल नंबर 2,338/2023 और ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के बीच अंतर को विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि ड्राफ्ट बिल 2,338/2023 AI के लिए व्यापक क्षैतिज नियामक ढांचा तैयार करने का प्रयास करता है, जिसमें जोखिम वर्गीकरण, गवर्नेंस दायित्व और नियामक पर्यवेक्षण शामिल हैं।
वहीं, ड्राफ्ट बिल 4/2025 ब्राजीलियाई नागरिक संहिता में व्यापक सुधार का प्रस्ताव करता है और निजी कानून के दृष्टिकोण से AI से जुड़े मुद्दों को संबोधित करता है। इसमें व्यक्तित्व अधिकार, स्वचालित निर्णय, नागरिक दायित्व, सिंथेटिक इमेज, डिजिटल संपत्ति, डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट जैसे विषय शामिल हैं। प्रो. रिबेरो ने कहा कि दोनों प्रस्ताव स्वतंत्र होने के साथ-साथ एक-दूसरे के पूरक भी हैं।
डीपफेक से स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट तक समझाईं चुनौतियां
व्याख्यान को व्यावहारिक उदाहरणों से भी जोड़ा गया। AI आधारित डिजिटल लोन आवेदन को पर्याप्त स्पष्टीकरण के बिना खारिज किए जाने, धोखाधड़ी वाले ट्रांसफर को मंजूरी दिलाने के लिए डीपफेक आवाज के इस्तेमाल, भेदभावपूर्ण परिणाम देने वाले बाहरी क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल और गलत जानकारी के आधार पर स्वतः संपार्श्विक हस्तांतरित करने वाले स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट जैसे उदाहरणों के माध्यम से AI गवर्नेंस की वास्तविक चुनौतियों को समझाया गया।
प्रो. रिबेरो ने कहा कि जिम्मेदार AI गवर्नेंस के लिए डेटा सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, वित्तीय निगरानी, साइबर सुरक्षा, संविदात्मक सुरक्षा उपाय, मानवीय निगरानी और प्रभावी कानूनी उपचार जरूरी हैं।
नवाचार और मौलिक अधिकार विरोधी नहीं
समापन पर प्रो. रिबेरो ने कहा कि तकनीकी नवाचार और मौलिक अधिकारों को एक-दूसरे के विरोधी उद्देश्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को AI प्रणालियों की पहचान करने, उनके जोखिमों का वर्गीकरण करने, उनके संचालन का दस्तावेजीकरण करने और उनके प्रभावों की लगातार निगरानी करने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही AI आधारित तकनीकों से होने वाली संभावित क्षति के लिए जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत, ब्राजील और ग्लोबल साउथ के अन्य देश वित्तीय समावेशन, मानव गरिमा, तकनीकी विकास और संस्थागत जवाबदेही को आधार बनाकर विशिष्ट नियामक मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विशेष व्याख्यान से विधि के छात्रों, शोधार्थियों और कानूनी पेशेवरों को AI, डिजिटल फाइनेंस और वैश्विक नियमन के बीच तेजी से बदलते संबंधों की तुलनात्मक समझ मिली। साथ ही, आयोजन ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और ब्राजील के इटियूना विश्वविद्यालय के बीच अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संवाद एवं सहयोग को भी मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।


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