अंतर्जातीय विवाह से सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाले परिवार सम्मानित

‘मधु-हर सम्मान’ सामाजिक एकता और समानता का संदेश देता है : जसवंत सिंह सैनी

मेरठ। सनातन संगम न्यास, सुभारती शाखा के तत्वावधान में सामाजिक समरसता पुरस्कार ‘मधु-हर सम्मान’ समारोह का आयोजन स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय परिसर स्थित हरि सिंह नलवा प्रेक्षागृह में किया गया। समारोह में जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर अंतर्जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और आपसी प्रेम का संदेश देने वाले परिवारों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन एवं सनातन प्रार्थना के साथ किया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (औद्योगिक विकास एवं संसदीय कार्य) जसवंत सिंह सैनी रहे। इस अवसर पर सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं सनातन संगम न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज, सनातन संगम न्यास मेरठ शाखा के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव, संयोजक विवेक सोम, सुभारती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) एम.के. मित्तल, कर्नल राजेश त्यागी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि जसवंत सिंह सैनी ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता और आपसी भाईचारे में निहित है। जाति के आधार पर बनी दूरियां समाज को कमजोर करती हैं, जबकि प्रेम, समानता और परस्पर सम्मान समाज को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूढ़ियों से ऊपर उठकर दो परिवारों को एक करने वाले लोग केवल अपने परिवार को नहीं जोड़ते, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भेदभाव से मुक्त और समरस समाज के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए। ‘मधु-हर सम्मान’ जैसी पहल सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ समानता और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने समाज को जोड़ने की इस मुहिम के लिए डॉ. अतुल कृष्ण की सराहना करते हुए कहा कि सनातन संगम न्यास के माध्यम से शुरू की गई यह पहल सामाजिक समरसता की दिशा में प्रशंसनीय प्रयास है।

राष्ट्रधर्म होना चाहिए सर्वोपरि : डॉ. शल्या राज

सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने कहा कि आज ऐसे समाज के निर्माण की आवश्यकता है, जहां जाति, धर्म और पंथ के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो। जिस समाज के सभी अंगों में एकता होती है, वही देश को आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए राष्ट्रधर्म सर्वोपरि होना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रधर्म से ऊपर कुछ भी नहीं है।

प्रेम और सम्मान से ही जुड़ता है समाज : डॉ. अतुल कृष्ण

सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं सनातन संगम न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम मानवीय संवेदना, प्रेम और सम्मान है। जाति के नाम पर खड़ी की गई सामाजिक दीवारों को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। जब दो परिवार सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर एक-दूसरे को स्वीकार करते हैं तो यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का संदेश बन जाता है।

उन्होंने कहा कि ‘मधु-हर सम्मान’ का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सम्मान देना है, जिन्होंने अपने निर्णय से समाज को यह संदेश दिया कि रिश्तों की मजबूती जाति से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान से होती है। जातिविहीन समाज के बिना कोई भी राष्ट्र पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों का सम्मान अन्य लोगों को भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। सामाजिक समरसता केवल विचार नहीं, बल्कि इसे व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।

सनातन संगम न्यास मेरठ शाखा के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव ने न्यास और ‘मधु-हर सम्मान’ के उद्देश्य से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर रिश्तों को स्वीकार करने वाले परिवार समाज के लिए प्रेरणा हैं। ऐसे उदाहरणों को सम्मान मिलने से युवा पीढ़ी में भी समानता और समरसता की सोच मजबूत होगी।

समारोह में जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर वैवाहिक संबंधों के माध्यम से दो परिवारों को जोड़ने वाले परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज की वास्तविक मजबूती जातिगत विभाजन में नहीं, बल्कि समानता, प्रेम, सम्मान और भाईचारे में है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका मेहरोत्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अनिल अज्ञात ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. सत्यम खरे, स्नेहीलाल सिब्बन, डॉ. सौकिन्द्र कुमार, डॉ. एस.सी. तिवारी, डॉ. रीना विश्नोई, डॉ. पंकज किशोर मिश्रा, डॉ. सरताज अहमद, कर्नल राजेश त्यागी (सेनि.), राजकुमार सागर, पराग गुप्ता, अशोक टकसालिया, कैप्टन (डॉ.) गीता परवंदा (सेनि.), डॉ. रविंद्र कुमार जैन, लता कुमार, डॉ. पिंटू मिश्रा, डॉ. इंद्रनील बोस, डॉ. विश्वास मिश्रा, डॉ. मनीष पाठक, डॉ. शशिराज तेवतिया, डॉ. प्रीति सिंह, राम प्रकाश तिवारी, प्रिंस सुभारती सहित विभिन्न विभागों एवं संकायों के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

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