चीनी की जमाखोरी पर शिकंजा, 2.69 लाख मीट्रिक टन स्टॉक की निगरानी
मेरठ। चीनी की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्रशासन और गन्ना विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। मेरठ परिक्षेत्र में चीनी के स्टॉक, बिक्री और उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है। चीनी मिलों से लेकर डीलरों, थोक विक्रेताओं और बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक का संयुक्त टीमों द्वारा सत्यापन किया जा रहा है।
मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त यशपाल सिंह ने बताया कि वर्तमान में परिक्षेत्र में 2,69,672.46 मीट्रिक टन चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में कृत्रिम अभाव की कोई स्थिति नहीं है। शासन के निर्देशों के तहत जमाखोरी, कालाबाजारी या कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रोज पोर्टल पर दर्ज होगा स्टॉक
चीनी के स्टॉक की निगरानी को तकनीक आधारित बनाया गया है। जिला गन्ना अधिकारियों को एसजीके पोर्टल पर चीनी मिलों के दैनिक स्टॉक की निर्धारित प्रारूप में प्रविष्टि कराने और आंकड़ों का नियमित अनुश्रवण करने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल पर दर्ज सूचनाओं का परीक्षण कर आवश्यक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
चीनी मिलों के स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। बाजार में डीलरों, थोक विक्रेताओं और बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी नजर रखी जा रही है। निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक, बिक्री और उपलब्धता में असामान्य अंतर या संदिग्ध गतिविधि मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई होगी।
400 टन से अधिक स्टॉक रखने पर रोक
भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार चीनी डीलर प्राप्त चीनी को 30 दिन से अधिक अवधि तक भंडारित नहीं कर सकते। किसी भी समय डीलर के पास 400 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए। वहीं 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक मासिक खपत वाले बल्क कंज्यूमर्स के लिए भी 15 दिन से अधिक अवधि तक चीनी का स्टॉक रखने पर प्रतिबंध है।
चीनी मिलों द्वारा बिक्री के बाद निर्धारित अवधि से अधिक समय तक चीनी को अपने परिसर या गोदाम में रोककर रखने की प्रवृत्ति पर भी निगरानी की जा रही है।
सात जिलों में गठित की गईं निगरानी टीमें
मेरठ परिक्षेत्र के सात जिलों में स्टॉक की जांच और बाजार निगरानी के लिए जिला स्तरीय टीमें गठित की गई हैं। मेरठ में विपणन निरीक्षकों और पूर्ति निरीक्षकों की संयुक्त टीम बनाई गई है। बागपत में एसडीएम, जिला गन्ना अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी और जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी की टीम निगरानी करेगी।
हापुड़ में एसडीएम, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन एवं पूर्ति निरीक्षक तथा मंडी समिति सचिव की संयुक्त टीम, जबकि गाजियाबाद में विपणन निरीक्षकों की टीम निगरानी करेगी। बुलंदशहर में एसडीएम, मंडी परिषद सचिव एवं विपणन निरीक्षक तथा अलीगढ़ में एडीएम समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम कार्रवाई करेगी। मथुरा में एरिया मार्केटिंग ऑफिसर, मंडी समिति प्रतिनिधि और खाद्य निरीक्षक की टीम निगरानी करेगी।
मंडल स्तर पर भी निरीक्षण दल गठित किए जा रहे हैं। उप गन्ना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रशासन और गन्ना विभाग का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और पारदर्शिता बनाए रखना है।


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