भूटान ने  भारत से E20 पेट्रोल लेने से किया साफ इंकार!

मुख्य कारण सुरक्षित भंडारण इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल नमी सोखने वाला होता है

नई दिल्ली। भारत में इस समय ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट में कहा जा रहा है कि E20 ब्लेंड (जिसमें 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल होता है) से गाड़ियों को भारी नुकसान हो रहा है। इन सबके बीच E20 पेट्रोल को लेकर एक खबर भारत के पड़ोसी देश भूटान से भी आई है। खबर यह है कि भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के E20 पेट्रोल सप्लाई करने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। यानी वहां कि सरकार भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से ई20 पेट्रोल नहीं खरीदना चाहती। हालांकि, इस खबर की पुष्टि जागरण बिजनेस नहीं करता।भूटान की वेबसाइट thebhutanese के अनुसार भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल लेने से मना करने के पीछे की वजह इंजन की कम्पैटिबिलिटी (अनुकूलता) से कहीं ज्यादा गंभीर चिंताएं बताई हैं।

भूटानी मीडिया वेबसाइट thebhutanese के अनुसार उसने व्यापार विभाग से यह सवाल पूछा और जानना चाहा कि क्या चुनजोम में हमारी लैब इथेनॉल की जांच कर रही है। इस सवाल के जवाब में विभाग ने कहा कि भूटान E20 पेट्रोल का आयात नहीं कर रहा है। भूटान के अधिकारियों के अनुसार, समस्या साफ-सुथरे ईंधन का विरोध नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रूप से स्टोर करने की व्यावहारिक चुनौती है।

इस रिपोर्ट के अनुसार विभाग ने कहा कि सामान्य MS (पेट्रोल) के उलट, इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल में हाइड्रॉक्सिल (-OH) ग्रुप होता है, जिससे यह हाइग्रोस्कोपिक (नमी सोखने वाला) बन जाता है। यानी यह आसानी से पानी को सोख लेता है और उसमें मिल जाता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिमालयी देश ने कहा है कि उसका ईंधन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इथेनॉल-मिश्रित ईंधन को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए तैयार नहीं है। इससे पता चलता है कि भूगोल और इंफ्रास्ट्रक्चर भी ऊर्जा नीति को उतना ही प्रभावित कर सकते हैं जितना कि पर्यावरण संबंधी लक्ष्य।

भारत कच्चे तेल का आयात कम करने के लिए बायोफ्यूल पर कर रहा काम

भूटान से यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारत कच्चे तेल के आयात को कम करने, उत्सर्जन घटाने और घरेलू बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल होता है और देश में साफ-सुथरे ईंधन की ओर बढ़ने की प्रक्रिया के तहत अब इसे पूरे भारत में बड़े पैमाने पर पेश किया जा रहा है।

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