आईआईएमटी विश्वविद्यालय में दो दिवसीय ज्योतिष एवं समाधान कार्यक्रम का समापन

देशभर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों ने साझा किए ज्योतिष के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आयाम, प्रथम बैच के विद्यार्थियों को मिले प्रमाणपत्र

मेरठ। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ज्योतिष एवं समाधान कार्यक्रम का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में देशभर से आए प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों, विद्वानों एवं विशेषज्ञों ने ज्योतिष के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक पक्षों पर विचार साझा किए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रथम बैच के उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. एच.एस. रावत ने भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग्य गुरु के मार्गदर्शन में अर्जित ज्योतिष ज्ञान समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ग्रहों की स्थिति, ज्योतिषीय गणनाओं और उपायों के माध्यम से ग्रहों के प्रभाव को समझने पर विस्तार से चर्चा की।

धर्मेंद्र बंसल ने ‘अधान कुंडली’ विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि गर्भधारण के समय की कुंडली के आधार पर किस प्रकार फलित किया जाता है। उन्होंने इस विषय से जुड़े महत्वपूर्ण एवं सूक्ष्म ज्योतिषीय सूत्रों की जानकारी भी दी।

शिवसाधिका विश्वरूपा ने कहा कि सफल और श्रेष्ठ ज्योतिषी बनने के लिए साधना, अनुशासन और नियमों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना के बिना सटीक फलित संभव नहीं है।

मानवेंद्र ने कहा कि फलित सदैव अपने मूल सिद्धांतों और स्थान के अनुरूप किया जाना चाहिए। जन्म कुंडली में ग्रहों की शक्ति और गोचर की स्थिति के आधार पर प्रत्येक जातक को अलग-अलग परिणाम प्राप्त होते हैं।

आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहन गुप्ता ने कहा कि ज्योतिष को समझना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। ज्योतिष संभावित परिस्थितियों का पूर्व आकलन करने में सहायता करता है, जिससे व्यक्ति समय रहते उचित निर्णय लेकर जीवन को अधिक सफल और संतुलित बना सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा की इस महत्वपूर्ण विद्या का गंभीरता से अध्ययन कर इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तराखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. नंदकिशोर पुरोहित ने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, समय और गणनाओं के आधार पर ज्योतिष जीवन के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्योतिष वैज्ञानिक गणनाओं, शास्त्रीय सिद्धांतों और अनुभव पर आधारित है, इसलिए इसे अंधविश्वास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ज्योतिष के सिद्धांतों को सही ढंग से समझकर उनका उपयोग किया जाए तो जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय अधिक विवेकपूर्ण ढंग से लिए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेषज्ञों ने ज्योतिष के वैज्ञानिक पक्ष, शोध की संभावनाओं और आधुनिक जीवन में इसकी उपयोगिता पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों में भाग लेकर अपने अनुभव और शोध भी प्रस्तुत किए।

ज्योतिष विभाग की डीन डॉ. आशा त्यागी ने सभी अतिथियों, विद्वानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग ने अल्प समय में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने बताया कि विभाग के प्रथम बैच के विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत कैंपस प्लेसमेंट प्राप्त हुआ है, जो विभाग की गुणवत्ता और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।

कार्यक्रम के दौरान आगंतुकों ने देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों से व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त किया। वहीं विभाग के विद्यार्थियों ने कुंडली विश्लेषण के माध्यम से अपनी व्यावहारिक दक्षता का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन एकता शर्मा ने किया।

इस अवसर पर डॉ. एच.एस. रावत, धर्मेंद्र बंसल, निदेशक प्रशासन डॉ. संदीप कुमार, एडमिशन डीन डॉ. संगीत वशिष्ठ, सहायक प्राध्यापक हिमशिखा बंसल सहित विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष, संकाय अध्यक्ष, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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