शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट विवाद: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकीं नजरें
मेरठ, 14 जुलाई। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के भविष्य को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई शुरू हो गई है। इस सुनवाई के नतीजों से बाजार की 44 सील हो चुकी संपत्तियों समेत पूरे मार्केट की आगे की दिशा तय होगी। कोर्ट की इस कार्यवाही के शुरू होते ही धरना स्थल और स्थानीय लोगों के बीच भारी बेचैनी का माहौल है।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह मामला सुनवाई की सूची में 302वें नंबर पर है। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की याचिका पर चल रही इस सुनवाई में सरकार, आवास एवं विकास परिषद, व्यापारियों और अन्य संबंधित पक्षों की पैरवी करने के लिए कुल 52 अधिवक्ता अदालत में मौजूद हैं।
महिलाओं ने किया सुंदरकांड का पाठ, माहौल हुआ भावुक
पिछले तीन महीनों से लगातार आंदोलन और धरना दे रहे व्यापारियों और उनके परिवारों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। सुनवाई शुरू होने की खबर आते ही सेक्टर-2 में स्थानीय निवासियों और महिलाओं ने सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों से गुहार और कानूनी लड़ाई समेत हर मुमकिन कोशिश कर ली है, और अब उनके आशियाने, दुकान और भविष्य का फैसला केवल भगवान के हाथ में है। इस दौरान धरना स्थल पर कई महिलाएं भावुक हो गईं।
पूरा मामला: कब क्या हुआ?
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का यह विवाद दशकों पुराना है, जो एक आवासीय भूखंड पर अवैध रूप से बनी दुकानों से शुरू हुआ था:
1978: यूपी आवास विकास परिषद ने शास्त्रीनगर योजना संख्या-3 लॉन्च की, जिसमें केवल आवासीय उपयोग की अनुमति थी।
1986 से 1990: भूखंड संख्या 661/6 पर आवासीय नियमों के विपरीत 22 दुकानों का कॉम्प्लेक्स खड़ा किया गया। सितंबर 1990 में आवास विकास ने पहला नोटिस जारी किया।
फरवरी 2004 व मार्च 2005: परिषद द्वारा अवैध निर्माण रोकने और फिर ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए।
17 सितंबर 2025: एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया।
25 अक्टूबर 2025: 22 दुकानों वाले कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया।
27 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में आवासीय प्लॉटों पर चल रही सभी व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने का आदेश दिया।
8 अप्रैल 2026: प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 44 पूर्ण रूप से व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया।
आंकड़ों में समझें बाजार का ढांचा
सेंट्रल मार्केट की 860 संपत्तियों में नियमों को ताक पर रखकर कॉमर्शियल निर्माण किया गया है, जिनका ब्योरा इस प्रकार है:
| संपत्ति का प्रकार | आकार / विवरण | कुल संख्या |
| मकान (कुल 630) | 50 मीटर तक | 249 |
| 51 से 100 मीटर | 222 | |
| 101 से 150 मीटर | 68 | |
| 151 से 300 मीटर | 80 | |
| 301 से 500 मीटर | 10 | |
| 501 से 1200 मीटर | 01 | |
| आवासीय प्लॉट (कुल 230) | 1 से 50 मीटर | 01 |
| 51 से 100 मीटर | 17 | |
| 101 से 150 मीटर | 06 | |
| 151 से 300 मीटर | 124 | |
| 301 से 500 मीटर | 78 | |
| 501 मीटर से बड़े | 04 |
नोट: आवास विकास परिषद ने इन आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक (कॉमर्शियल) में बदलने के लिए ₹36,000 प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क जमा करने का नोटिस दिया है।
फिलहाल 44 संपत्तियों के सील होने के बाद बचे हुए 816 स्वामियों को भी नोटिस जारी किया जा चुका है। ऐसे में आज होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस पूरे बाजार के वजूद और सैकड़ों परिवारों की आजीविका का भविष्य तय करेगी।


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