मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी?
कौन से नए चेहरों को मिलेगी जगह...किसका पत्ता होगा साफ
मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, यह फेरबदल मानसून सत्र जो जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है, उससे पहले हो सकता है।सरकार की नजर में यह बदलाव न सिर्फ प्रशासनिक जरूरत है, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्यों को तेज गति देने का रणनीतिक कदम भी है। सूत्रों की माने तो इसी फेरबदल से पहले पीएम मोदी ने मंगलवार को सभी मंत्रालयों के सचिवों से मुलाकात की थी।
सूत्रों की माने तो सरकार का मानना है कि, बीजेपी के नए संगठनात्मक ढांचे (नितिन नबीन की टीम) के साथ कैबिनेट को पूरी तरह समन्वित करना जरूरी है. कुछ मंत्रियों को पार्टी संगठन में भेजकर और नए चेहरों को सरकार में लाकर दोनों को मजबूत किया जाएगा।
सरकार के सूत्रों का कहना है कि, यह फेरबदल कोई साधारण बदलाव नहीं, बल्कि शासन को और अधिक प्रभावी, समावेशी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक सोचा-समझा कदम होगा।पार्टी सूत्रों कि माने तो, होनेवाले संभावित फेरबदलब को परफॉर्मेंस रिव्यू का हिस्सा भी माना जा रहा है। दो साल पूरे होने के बाद सरकार अपनी कार्यशैली को और बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठा रही है।
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, फेरबदल यदि होता है तो उसकी मुख्य वजह कुछ इस तरह है, जिनमें कुछ मंत्रालयों में काम की गति बढ़ाने की जरूरत है। जहां विवाद (जैसे शिक्षा क्षेत्र में पेपर लीक) या सुधार की मांग है, वहां ताजा और गतिशील नेतृत्व लाना जरूरी है।
सरकार का मानना है कि, नया खून मंत्रालयों में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण लाएगा. साथ ही विभिन्न राज्यों, जातियों, पिछड़े वर्गों और महिला प्रतिनिधित्व को और मजबूत करना है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप देने के लिए यह जरूरी है।
इसके अलावा सूत्रों की माने तो सभावित फेरबदल सहयोगी दलों को और अधिक जगह देकर गठबंधन को 2029 से पहले और मजबूत किया जा सकता है. इसके तहत कुछ नए चेहरों या सहयोगियों को शामिल करने से राजनीतिक स्थिरता भी सरकार में बढ़ने की संभावना होगी।
इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक, संभावित फेरबदल में सरकार औसत उम्र कम करने और लंबे समय से पद संभाल रहे नेताओं को संगठन के दूसरे कामों में भी लगा सकती है. इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनावों (2027) और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी को लेकर भी मोदी सरकार का फोकस है।
पोल-बाउंड राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,पंजाब जैसे राज्यों से बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी कोशिश की जाएगी. साथ ही बिहार और बंगाल से भी कुछ नए चेहरे लिए जा सकते है. उसके अलावा सूत्रों कि माने तो सरकार कई पोर्टफोलियो संभाल रहे मंत्रियों पर भी बोझ कम करना और हर मंत्रालय को फोकस्ड लीडरशिप देने पर विचार कर सकती है।
जिन संभावित नामों को कैबिनेट में जगह दी जा सकती हैं उनमें मुख्य रूप से,श्रीकांत शिंदे (शिवसेना), अनुराग ठाकुर (वापसी),शक्तिकांत दास (पूर्व RBI गवर्नर),अरुण गोविल, नीतीश कुमार, राघव चड्ढा आदि के नाम शामिल होने की चर्चा है।
जबकि, जिन नामों को मंत्रिमंडल से हटाए जाने की चर्चा है वो हैं, धर्मेंद्र प्रधान (शिक्षा मंत्रालय) और हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्रालय). बहरहाल अभी तक आधिकारिक रूप से सरकार ने कुछ बयान नहीं दिया है मगर अंदरखाने ये विस्तार तय माना जा रहा है, जिसे सरकार जल्दी ही अमलीजामा पहनाएगी।


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