मद्रास हाई कोर्ट ने विजय सरकार को दिया झटका, करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार का आदेश किया रद्द, कहा- संवैधानिक प्रावधानों की सीमाओं में रहकर ही प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल हो

चेन्नई, 28 जुलाई। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार को बड़ा झटका देते हुए करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता के अधिकार के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।

जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की डिवीजन बेंच ने सोमवार, 27 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकारी नौकरियों में अनुकंपा नियुक्ति के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में लोग इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अन्य पात्र लोगों की अनदेखी करते हुए किसी विशेष घटना के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन इन शक्तियों का प्रयोग संविधान और उसके निर्धारित नियमों एवं सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि यदि करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने की अनुमति दी जाती है, तो भविष्य में इसी तरह की अन्य घटनाओं में भी सरकारी नौकरी की मांग का रास्ता खुल सकता है। अदालत ने आतिशबाजी दुर्घटनाओं और सड़क हादसों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आमतौर पर पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि या मुआवजा दिया जाता है, न कि सरकारी नौकरी।

32 परिजनों को दिए गए थे नियुक्ति पत्र

बताया गया है कि तमिलनाडु सरकार ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों में से 32 परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने जुलाई की शुरुआत में करूर का दौरा कर कुछ प्रभावित परिवारों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे थे।

27 सितंबर 2025 को हुई थी करूर भगदड़

गौरतलब है कि 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में टीवीके की एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता सहित अन्य राहत देने की घोषणा की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर सकती है।

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