वाह रे प्रबंधन
राजीव त्यागी
हम 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पहली बारिश में देश के तमाम शहर तालाब में तब्दील हो गए। वाह रे प्रबंधन, हर साल नाला सफाई पर करोड़ों खर्च के बाद भी शहरों की स्थिति बारिश के दिनों में बदहाल हो जाती है। हम आधुनिक बुनियादी ढांचे, स्मार्ट शहरों और वैश्विक स्तर की सुविधाओं का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन क्या हर मॉनसून हमारे इन सभी दावों की वास्तविकता सामने नहीं रख देता?
क्या यह सवाल पूछने का समय नहीं आ गया है कि यदि हमारे महानगर और राज्य की राजधानियां कुछ घंटों की बारिश भी नहीं झेल पा रही हैं, तो विकसित भारत की बुनियाद आखिर कितनी मजबूत है? क्या यह आश्चर्य की बात नहीं कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और गुरुग्राम जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र हर वर्ष मानसून आते ही जलभराव, जाम और अव्यवस्था की पहचान बन जाते हैं? क्या यह केवल मौसम की मार है, या फिर हमारी नगर योजना, निर्माण व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी की सबसे बड़ी असफलता है? यदि हर वर्ष यही स्थिति बननी है, तो फिर हर वर्ष होने वाली तैयारियों और बैठकों का परिणाम आखिर कहां दिखाई देता है?क्या स्मार्ट सिटी का अर्थ केवल चौड़ी सड़कें, चमकदार भवन और आकर्षक परियोजनाएं हैं?
क्या स्मार्ट शहर वह नहीं होना चाहिए जो सामान्य से अधिक बारिश को भी सहजता से संभाल सके? यदि अरबों रुपये जल निकासी, सड़क निर्माण और शहरी विकास पर खर्च हो रहे हैं, तो पहली तेज बारिश में ही सड़कें नदी और चौराहे तालाब क्यों बन जाते हैं? हर मानसून के बाद वही तस्वीरें, वही बयान और वही आश्वासन सुनना हमारी नियति बन चुकी है? क्या कभी किसी अधिकारी, किसी एजेंसी या किसी निर्माण करने वाली संस्था की जवाबदेही तय हुई?
क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं कि हर वर्ष खर्च होने वाला धन आखिर किस काम में लगाया जाता है?सोचने की बात है कि क्या समस्या केवल अधिक बारिश की है, या फिर प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण, बिना योजना के विस्तार, कमजोर निर्माण और रखरखाव की अनदेखी इसकी असली वजह है? क्या नदियों, तालाबों और पुराने जल निकासी मार्गों को पाटकर खड़ी की गई इमारतों की कीमत अब पूरा समाज नहीं चुका रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हम विकसित भारत की इमारत उस बुनियाद पर खड़ी कर रहे हैं जो हर मानसून में हिल जाती है। जरूरत इस बात की है कि विकास के दावों से पहले शहरों की जल निकासी व्यवस्था, निर्माण की गुणवत्ता, नगर नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाए।





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