कांवड़ यात्रा से पहले डीजे संचालकों की बढ़ी चिंता

 सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेई से मिले, बोले- हाईवे पर पाबंदी न लगे

मेरठ। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले डीजे संचालकों की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार को मेरठ डीजे एंड साउंड एसोसिएशन के पदाधिकारी राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई से मिले। उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर लगने वाली पाबंदियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से राहत दिलाने की मांग की।सांसद ने यूपी और उत्तराखंड सरकार से इस मुद्दे पर बात करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें एक राय बना लें तो डीजे संचालकों की परेशानी काफी हद तक दूर हो सकती है।

कांवड़ यात्रा के दौरान हादसों को रोकने के लिए यूपी और उत्तराखंड सरकार हर साल कुछ नियम तय करती हैं। पिछले साल डीजे की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तय की गई थी। डीजे संचालकों का कहना है कि इससे उनके कारोबार पर असर पड़ा। इसी वजह से इस बार उन्होंने पहले ही अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की पहल की है।

मेरठ डीजे एंड साउंड एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हेमंत शाक्य के नेतृत्व में डीजे संचालक शुक्रवार को डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई के आवास पहुंचे। उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान लगने वाली पाबंदियों और कारोबार पर पड़ रहे असर की जानकारी दी। साथ ही सरकार से राहत दिलाने की मांग की।

हेमंत शाक्य ने कहा कि एसोसिएशन डीजे की ऊंचाई और चौड़ाई तय करने का विरोध नहीं कर रही है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि हाईवे पर डीजे पर पाबंदी न लगाई जाए। शहर के अंदर जो नियम तय होंगे, उनका पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियम तोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई करे, एसोसिएशन को इससे कोई आपत्ति नहीं है।

उत्तराखंड पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी

डीजे संचालकों ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। उनका कहना है कि पिछले दो साल से उत्तर प्रदेश में भी जगह-जगह पुलिस डीजे रुकवाकर जांच करती है। कई बार सड़क पर ही डीजे खुलवा दिए जाते हैं। मुकदमे दर्ज होते हैं और नोटिस देकर थाने के चक्कर भी लगवाए जाते हैं।

डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई ने कहा कि कांवड़ यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है और इसमें डीजे भी अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि डीजे संचालकों से जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। उन्हें देखने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात करेंगे। जरूरत पड़ी तो पत्र भी लिखा जाएगा, ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके।

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