आईएएस योगेश सागर औ अभिलाषा के आवास पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट
मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के घर भी छापेमारी
पटना।टेंडर घोटाला मामले में जांच एजेंसियां तेजी से एक्शन ले रही हैं। मामले में विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे । आईएएस योगेश सागर और अभिलाषा शर्मा के ठिकानों पर शुक्रवार को स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने रेड की है। ये छापेमारी पटना के अलग-अलग ठिकानों पर हो रही है।
योगेश सागर के गर्दनीबाग स्थित आईएएस कॉलोनी के मकान नंबर E-2/10 पर SVU की टीम सुबह से ही जांच में जुटी हुई है। इसके अलावा अभिलाषा कुमारी शर्मा के नेहरू पथ स्थित आवास पर भी जांच एजेंसी ने दबिश दी है।इसके अलावा मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार के एसके विहार कॉलोनी, बेउर स्थित आवास पर भी SVU की टीम पहुंची। यहां भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। कंपनी और सरकारी टेंडरों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने रिशु श्री की कंपनियों को टेंडर देने में काफी मदद की है। इसके एवज में मोटी कमीशन मिली। ED की रिपोर्ट और SVU में FIR के बाद ही बिहार सरकार ने दोनों IAS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था।फिलहाल रिशु श्री पिछले 3 दिनों से पुलिस रिमांड पर है। टेंडर घोटाला को लेकर उससे पूछताछ चल रही है। सूत्रों की मानें तो उसने कई राज उगले हैं। इसी आधार पर आज छापेमारी चल रही है।
कौन हैं IAS योगेश कुमार सागर?
2017 बैच के IAS अधिकारी योगेश कुमार सागर समाज कल्याण विभाग में तैनात हैं। योगेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के हैं। उन्होंने 2012 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से MBBS किया था।
कठिनाइयों में बीता योगेश का बचपन
योगेश कुमार सागर का बचपन कठिनाइयों में बीता और पढ़ाई-लिखाई की। IAS बनने के बाद खुद के साथ रिश्तेदारों को भी यूरोप की सैर कराई। योगेश का जन्म 15 अप्रैल 1988 को हुआ था। पिता कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज विभाग में कॉन्स्टेबल थे। उनके 6 भाई और 4 बहनें हैं। पिता की सैलरी से बड़ी मुश्किल से परिवार का खर्च चल पाता था। 1990 में पिता की मौत हो हुई।पिता के जाने के बाद घर का खर्च चलाने का जिम्मा बड़े भाई शैलेश पर आ गया। वह IVRI बरेली में क्लर्क थे। 2 हजार रुपए वेतन था। इस पैसे से घर खर्च पूरा नहीं होता था। भाई-बहनों की स्कूल फीस भरने के लिए कर्ज लेना पड़ता था।
योगेश ने IAS बनने के बाद बताया था, 'घर में रोज एक टाइम भोजन बनता। सब्जी की जगह चटनी। आधा पेट खाना खाकर स्कूल जाते थे।'योगेश ने 2004 में बरेली के राजकीय इंटर कॉलेज से हाई स्कूल की पढ़ाई की। 2005 में CPMT क्वालीफाई किया। 2006 में लखनऊ के KGMU में MBBS में एडमिशन लिया। 2012 में पढ़ाई पूरी की फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने में जुट गए।
2013 में दिल्ली गए। 2014-15 में परीक्षा दी और पहली बार में IRS के लिए चुने गए। नागपुर में ट्रेनिंग ले रहे थे। इसी दौरान 2016-17 में फिर से सिविल सर्विस की परीक्षा दी और 223वीं रैंक के साथ क्वालीफाई किया।
फारबिसगंज SDO के रूप में शुरू हुआ था योगेश का करियर
योगेश कुमार सागर का करियर अररिया जिले के फारबिसगंज SDO के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद वह भागलपुर में निगम कमिश्नर रहे। 7 मार्च 2024 से लेकर 17 फरवरी 2025 तक बुडको के एमडी रहे। बुडको से ट्रांसफर होने के बाद समाज कल्याण विभाग में हैं।
कौन हैं IAS अभिलाषा शर्मा?
अभिलाषा शर्मा ग्रामीण विकास विभाग में जीविका की सीईओ हैं। बिहार कैडर की 2014 बैच की IAS अधिकारी अभिलाषा ने पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है।अभिलाषा का जन्म 26 जनवरी 1989 को हुआ था। इनके करियर की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय से हुई। वह बिहार सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं। सीतामढ़ी की डीएम के रूप में काम किया। वित्त विभाग में संयुक्त सचिव थीं।
अभिलाषा शर्मा के खिलाफ लगे क्या आरोप?
अभिलाषा के घर की छत पर बगीचा लगाया गया। आरोप है कि इस काम में लगने वाले 9 लाख रुपए रिशु ने दिए। उसने IAS अधिकारी के रिश्तेदारों को गोवा, दिल्ली और हैदराबाद घुमाया। पूरा खर्च दिया। इसके साथ ही रिशु ने आईफोन और दूसरे महंगे गिफ्ट दिए।
कितनी होती है IAS अधिकारी की सैलरी?
IAS अधिकारी भारत में प्रशासनिक सेवाओं में टॉप ऑफिसर होते हैं। केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों से लेकर जिला स्तर तक, इन अधिकारियों के जिम्मे सरकार के काम होते हैं।
एक आईएएस अधिकारी की सैलरी कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर है कि उन्होंने कितने साल सेवा दी, कैसा प्रदर्शन किया, कितने प्रमोशन मिले। इन बातों के आधार पर अधिकारी की बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपए प्रति महीने (कुल वेतन 3.69 लाख) तक पहुंच जाती है। इतना वेतन केंद्रीय कैबिनेट सचिव जैसे अधिकारियों का होता है। आईएएस अधिकारी को वेतन के साथ ही DA, HRA, TA समेत कई भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं।आईएएस अधिकारी 9 साल से अधिक समय से सेवा में हो और डीएम, संयुक्त सचिव या उप सचिव जैसे पद पर हो तो उनका वेतन 1.17 लाख रुपए प्रति महीना से अधिक हो सकता है। इसमें 78,800 रुपए बेसिक पे, 36288 रुपए DA, 12608 रुपए HRA और 4000 रुपए TA शामिल है।
रिशुश्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा सिर्फ टेंडर मैनेज नहीं करता था, बल्कि यह भी तय करता था कि किस विभाग में सचिव कौन होगा और किस शहर का नगर आयुक्त कौन बनेगा। रिशु ने अधिकारियों को उपकृत करने के लिए उन्हें और उनके परिवारों को विदेशों की सैर कराई।
संजीव हंस मामले की जांच के दौरान रिशु श्री का नाम सामने आया था। रिशु ने अवैध तरीके से 265.73 करोड़ की संपत्ति बनाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा स्वच्छ गंगा मिशन से आया, जहां उसने 185.25 करोड़ रुपए कमाए। वह सारा लेनदेन हवाला के जरिए करता था।
पहले जानिए कौन है रिशु श्री?
रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का निवासी है। सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है। उसके खिलाफ SVU ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है।


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