इंश्योरेंस या पेशेंट ट्रैप?
कैशलेस क्लेम के दौरान मरीज पर अस्पताल बदलने का दबाव डालने का स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर आरोप
मुंबई: स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के खिलाफ एक गंभीर आरोप सामने आया है, जिसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम पेमेंट बचाने के लिए मरीजों के अस्पताल चुनने के अधिकार को प्रभावित कर रही हैं?
शिकायत के अनुसार, सर्जरी के लिए एक प्रतिष्ठित मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती मरीज ने कैशलेस क्लेम के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि क्लेम अप्रूवल प्रक्रिया के दौरान Star Health के प्रतिनिधि ने मरीज को मौजूदा अस्पताल छोड़कर किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी, जबकि मरीज अपने इलाज और अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मरीज को मंजूर होने वाली क्लेम राशि की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे इलाज जैसे महत्वपूर्ण समय में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। यह भी आरोप लगाया गया है कि इस तरह का दबाव इंश्योरेंस पेआउट कम करने और मरीजों को चुनिंदा छोटे अस्पतालों की ओर मोड़ने के लिए डाला जा सकता है।
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
*क्या मरीजों को उनकी पसंद के अस्पताल से दूर किया जा रहा है?*
*क्या इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम अप्रूवल के नाम पर इलाज से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर रही हैं?*
*क्या पैसा बचाने के लिए मरीजों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है?*
हेल्थ इंश्योरेंस का उद्देश्य मरीजों को मेडिकल इमरजेंसी में सुरक्षा देना है, न कि उन्हें दबाव और असमंजस में डालना।
*मरीज और स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के कर्मचारी के बीच हुई फोन बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है।*



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