ऑन लाइन गेमिंग युवाओं को शराब से ज्यादा कर रहा बीमार
मेंटल हेल्थ ओपीडी में ग्रेमिंग के मामले शराब से ज्यादा 35 प्रतिशत अधिक मिले
मेरठ। नशे की बात होती है ततो सबसे पहले शराब,स्मैक्र, गांजा या ड्रग्स का नाम आता है। लेकिन अब ये तस्वीर भी बदल रही है। शहर में एक बड़ा वर्ग एक ऐसे नशे की गिरफ्त में फंसता जो रहा है जाे न तो बोलत में बिकता है न ही मेडिकल टेस्ट में पकड़ में आता है ओर न ही कोई गंध होती है । ऑन लाइन गेमिंग का नशा लोगों को एल्कोहल ज्यादा बीमार बना रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट भी यही कुछ कह रही है। आइए जानने का प्रयास करते है।
पिछले तीन माह मे मेंटल हेल्थ ओपीडी में गेमिंग एडिक्शन के मामले अल्कोहल डिपेेंडेसी से लगभग 35 प्रतिशत अधिक तक बढ़े मिले है। चौंकाने वाली बात यह है कि गेमिंग एडिक्शन में मरीजों में बडी संख्या में ऐसे की मिली है जो किसी अन्य नशे का सेवन नहीं करते जहै।मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की माने तो उनका कहना है ऑनलाइन गेमिंग अब एंटरटेनमेंट नहीं रह गए हैं है। ये रिवार्ड साइकोलॉजी ,इंस्टेंट ,ग्रेटिफिकेशन और कम्पिटटिटिव बिहेवियर पर आधारित एल्गोेरिदमिक सिस्टम बन चुके है। इन गेम्स में हर जीत, हर लेवल अप ,हर रिवार्ड बाॅक्स और हर रैकिंग दिमाग में डोपोमिन रिलीज करती है। यही कमिकल ब्रेन को बार-बार उसी एक्सपीरियंस की तलाश में वापस ले जाता है। इन गेम्स में दूसरे प्रतिभागियों के साथ लगातार वर्चुअल कॉम्पटीशन चलता रहता है। हर जीत पर बडे रिवोर्डस मिलते है। दिमाग लगातार इस रिवार्ड के नशे में लगा रहता है।
जिला अस्पताल की क्लिनिकल काउंसलर डा. विभा नागर का कहना है मेंटल हेल्थ ओपीडी में आने वाले ऑनलाइन गेमिंग एडििक्शन ओर एल्कोहल एडिक्शन से जुड़े मरीज की संख्या और प्रवृतियो में क्या अंतर दिखाई देता है इस समझने के लिए ये स्टडी की गई। जिसमें पाया गया कि डिजिटल प्लेटफार्म की बढ़ती पहुंच ,स्मार्टफोन और प्रतिस्पर्धा वाले आनलाइन गेम्स के कारण युवा वर्ग में गेमिंग एडिक्शन तेजी से बढ़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री की प्रो राशि अग्रवाल ने बताया कि अल्कोहल शरीर को प्रभावित करती है। जबकि गेमिंग एडिक्शन सीधे बिहेवियर और ब्रेन रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करती है। ये नशा एल्कोहल के नशे से कम नहीं है।
क्लिलिकल कांउसलर तनिषा अग्रवाल का कहना है कि डिजिटल प्लेटफार्म के बढ़ते उपयोग के साथ गेमिंग एडिक्शन आने वाले दशक की बड़ी पब्लिक हेल्थ चेैलेज बन सकती है। न्यू जरनेशन इसका तेजी से शिकार बन रही है।
लापरवाही पड़ रही भारी
एक्सपटर्स के अनुसार डिजिटल एडिक्शन का एक बड़ा कारण अभिभावक की लापरवाही है। उनकी अनदेखी के चलते बच्चे सबसे अधिक इसके शिकार हो रहे है। काउंसिंग के दौरान निकलकर सामने आए कि डिजिटल एडिक्शन के लक्षण सामान्य व्यवहार की तरह दिखाई देते है। अभिभावक सिर्फ इस बात से बेफ्रिक हो जाते है कि उनका बच्चा घर में सुरक्षित है। यही कारा उन्हें इस बात का शिकार बना रहा है।
अटेंशन इकोनॉमी में फंस रही नयी जनरेशन
ऑन लाइन गेमिंग का पूरा स्ट्रक्चर यूजर्स रिटेशन पर आधारित है। जितना ज्यादा समय व्यक्ति स्क्रीन पर बिताएगा उतना ज्यादा एंगजेमेंट ओर रेवन्यू पैदा होगा। यही कारण है कि रिवार्ड सिस्टम ,डेली मिशन, रैकिंग प्रेशर और लिमिटेड टाइम इवेेंटस को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि खिलाड़ी बार-बार वापस आए।
तीन माह मेंओपीडी पहुंचे मरीज
ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन 1567
डिप्रेशन एडिक्शन 1005
एंग्जाइटी डिसआर्डस 998
सोशल मीडिया एडिक्शन 546
अन्य समस्याएं 541


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