अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में डॉ. अनिल मिश्र तलब

 आज करेगी डा मिश्र से टीम पूछताछ , नृपेंद्र मिश्र बोले— 'जमीन विवाद से भी ज्यादा गंभीर है यह चोट'

अयोध्या।   राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावे की राशि में हुए करोड़ों रुपये के कथित गबन की जांच अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सख्त पूछताछ के बीच अब जांच की आंच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचती दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गोपाल राव से हुई लंबी पूछताछ के बाद अब गुरुवार को ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को तलब किया गया है। माना जा रहा है कि डॉ. अनिल मिश्र से दान राशि के प्रबंधन, गिनती और संबंधित व्यवस्थाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सीधे जवाब मांगे जाएंगे।

इस बीच, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस पूरे दान प्रकरण को मंदिर की छवि को 'गंभीर चोट' देने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि यह मौजूदा विवाद पहले सामने आए जमीन खरीद विवाद से भी कहीं अधिक गंभीर और चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने राम मंदिर जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के धार्मिक केंद्र के प्रबंधन के लिए जल्द से जल्द एक अनुभवी और सक्षम मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा विशेष कार्याधिकारी की नियुक्ति करने की बड़ी मांग उठाई है।

ट्रस्ट की पसंद के कर्मचारी: जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती के लिए बैंक ने एक आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कर्मचारियों को रखा था, लेकिन इन कर्मचारियों का चयन सीधे ट्रस्ट की ओर से किया गया था। ये लोग किसी प्रभावशाली पदाधिकारी के परिचित बताए जा रहे हैं।

सुरक्षा में भारी चूक: सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि करोड़ों रुपये की नकदी गिनने वाले इन कर्मचारियों का न तो कभी कोई उचित पुलिस सत्यापन कराया गया और न ही उनकी कोई नियमित तलाशी ली गई। ये कर्मचारी ट्रस्ट का पहचान पत्र लगाकर बिना किसी रोक-टोक के आसानी से मंदिर परिसर में आवाजाही करते थे।

कम वेतन पर आलीशान जिंदगी: जिन संदिग्ध कर्मचारियों के पास से नकद राशि और संपत्ति के दस्तावेज बरामद होने की बात कही जा रही है, वे महज 12 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर कार्यरत थे, लेकिन वे दिन-रात मंदिर परिसर में ही रहते थे। जांचकर्ता अब इस पेचीदा सवाल को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इतने कम वेतन में इनके पास अचानक बड़ी नकदी और अचल संपत्ति कहां से आई।

चढ़ावे की वास्तविक राशि शुरू से ही बेहिसाब होने के कारण गबन की सटीक रकम का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है, क्योंकि जो राशि आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हुई, वह पूरी तरह हिसाब से बाहर रह गई।

आरएसएस में भारी नाराजगी, भैयाजी जोशी ने साकेत निलयम में रात भर की मंत्रणा

इस पूरे मामले के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भीतर भी एक वर्ग में भारी नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, नोटों की गिनती समेत राम मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए आरएसएस ने पूरे देश से अपने 500 कुशल स्वयंसेवक भेजे थे। आरोप है कि ट्रस्ट ने इन सभी स्वयंसेवकों को 3 महीने तक जूतों की रखवाली के काम में लगाने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया और अपनी पसंद के लोगों को रख लिया।

इसी नाराजगी के बीच, आरएसएस के सह कार्यवाह भैयाजी जोशी बेहद गोपनीय रूप से अयोध्या पहुंचे और उन्होंने 'साकेत निलयम' में पूरी रात अपने करीबियों के साथ अहम मंत्रणा की। मंदिर परिसर में काम करने वाले एक अधिकारी ने उनसे मुख्य संदेहास्पद कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की कार्यशैली को लेकर अपनी गहरी पीड़ा भी जताई थी।

दूसरी तरफ, चंपत राय के करीबी माने जाने वाले आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की पत्नी पूनम यादव ने अपने पति का बचाव करते हुए सामने आकर कहा है कि उनके पास 50 कमरे, हॉस्टल, होटल और लग्जरी गाड़ियों जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने इसे अपने पति को फंसाने की एक सुनियोजित साजिश बताया है। फिलहाल, एसआईटी (SIT) की टीम बैंक अधिकारियों और वित्तीय रिकॉर्ड के साथ कड़ियां जोड़ने में जुटी है, और डॉ. अनिल मिश्र से होने वाली आज की पूछताछ पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। 

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