शोहरत के बीच भी अकेलापनः शुभांगी अत्रे

मुंबई। टीवी इंडस्ट्री में लंबे समय से काम कर रहीं शुभांगी अत्रे ने अकेलेपन और रिश्तों की सच्चाई को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यह अकेलापन सिर्फ भीड़ या लोगों की कमी से नहीं होता, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और बातचीत की कमी से होता है।
शुभांगी अत्रे ने कहा, ''मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं, क्योंकि मेरी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग हैं, जो सच में मुझसे पूछते हैं, 'आप कैसी हैं?' और जवाब का इंतजार भी करते हैं। किसी इंसान के लिए सबसे बड़ा सुकून यही होता है कि कोई उसे बिना टोके, बिना जज किए ध्यान से सुने। कई बार सलाह से ज्यादा राहत सिर्फ सुन लिए जाने से मिलती है।'' उन्होंने आगे कहा, "अकेलापन अक्सर इस वजह से महसूस होता है क्योंकि लोगों के बीच बातचीत तो होती है, लेकिन वह गहराई नहीं होती, जो दिल को छू सके। आजकल लोग एक-दूसरे से जुड़े तो रहते हैं, लेकिन बातचीत अक्सर सतही रह जाती है। ऐसे में इंसान भीड़ में रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है। मेरा मानना है कि एक खुली बातचीत, जिसमें व्यक्ति अपने असली विचार और भावनाएं बिना डर के रख सके, वह कई रिश्तों से ज्यादा कीमती होती है।''

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