जीवन से खिलवाड़
राजीव त्यागी 
भारत में सामान्यतः: उत्पादों पर गुणवत्ता व उपयोग-तिथि के दावों के बावजूद उसके सेहत से जुड़े सरोकार सवालों के घेरे में रहे हैं। यह आम धारणा बनी हुई है कि कुछ लोग मुनाफे के लिए सामान की एक्सपायरी डेट दर्ज करने में हेरफेर करने तक से नहीं चूकते। अक्सर प्रतिष्ठित उत्पाद वाली कंपनियों के लेबल लगाकर हल्के सामान बेचने के मामले भी उजागर होते हैं। हकीकत है कि आकर्षक पैकेजिंग के जरिये उत्पाद की न्यूट्रिशन से जुड़ी जानकारी को पार्श्व में डाल दिया जाता है। 

विडंबना यह है कि देश में ऐसा नियामक तंत्र विकसित नहीं हो पाया है जो लगातार जनहित में खाद्य उत्पादों की जांच-पड़ताल कर सके। कई एलर्जी व रोगों से जूझने वाले लोगों को कुछ उत्पादों में मौजूद पदार्थों की वजह से लंबे समय तक रहने वाली परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन विडंबना यह है कि उत्पादों के लेबल पर आधी-अधूरी, अस्पष्ट जानकारी ही दी जाती है। 

अक्सर उत्पादों पर हेल्दी, नेचुरल और आयुर्वेद पद्धति पर आधारित जैसे लुभावने शब्दों का इस्तेमाल करके ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है, जिससे उपभोक्ता असमंजस की स्थिति में पड़ आते हैं। मधुमेह, एलर्जी और खानपान से जुड़े दूसरे परहेजों में अस्पष्ट व गलत जानकारी हानिकारक हो सकती है। उत्पादकों की ईमानदारी व उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर भरोसा करना ग्राहकों के लिए मुश्किल हो जाता है। जैसे-जैसे भारतीय समाज में पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का प्रचलन तेजी से बढ़ा है, देश में एक मजबूत नियामक ढांचे की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। देखने में आता है कि छोटे दुकानदार अपने नुकसान को बचाने के लिए उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देते हैं। एक प्रतिबद्ध नैतिकता का अभाव इस मुनाफे के कारोबार में अक्सर नजर आता है। 

दरअसल, किसी उत्पाद के पैकेट में उल्लेखित जानकारी ग्राहक के समझने के लिए आसान होनी चाहिए। साथ ही बिना तथ्य व तार्किकता के सेहत से जुड़े दावे करने वाले उत्पादकों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। इसके लिये जरूरी है कि समय-समय पर इन उत्पादों की उत्पादन प्रक्रिया की औचक निगरानी व पड़ताल होनी चाहिए। 

उपभोक्ता जागरूकता अभियान को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाया जाए। इस अभियान में स्कूलों, हेल्थकेयर संस्थानों और विभिन्न मीडिया समूहों को आम लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए कि किसी उत्पाद में दर्ज न्यूट्रिशन लेबल को कैसे समझें। कैसे भ्रमित करने वाले दावों की पड़ताल करें। साथ ही कैसे वे सेहत के अनुकूल उत्पादों के विकल्प का चयन कर सकें।

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