कोरी समाज का महाधरना

प्रमाण पत्र के नाम पर 35 साल से उत्पीड़न,प्रशासन को दी चेतावनी

मेरठ। मेरठ मंडल और सहारनपुर मंडल के कोरी/भुईयार समाज के हजारों लोगों ने सोमवार को चौधरी चरण सिंह पार्क, कमिश्नरी मेरठ में महाधरना प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 35 वर्षों से जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में तहसील प्रशासन द्वारा अनावश्यक देरी, आपत्तियां और मनमानी रिपोर्ट लगाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

धरने में शामिल समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार द्वारा जारी शासनादेशों और न्यायालय के आदेशों के बावजूद जमीन स्तर पर उनका पालन नहीं किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में पात्र व्यक्तियों के प्रमाण पत्र जानबूझकर निरस्त कर दिए जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में न्यायालय में मामला जाने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि शासनादेश 16 जनवरी 2020, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के निर्देशों तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को तहसील और लेखपाल स्तर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। समाज के लोगों ने कहा कि “जुलाहा” कोई जाति नहीं बल्कि पेशा है, फिर भी इसे आधार बनाकर जाति प्रमाण पत्र रोक दिए जाते हैं।

एक उदाहरण देते हुए समाज के लोगों ने बताया कि मवाना तहसील के कंकरखेड़ा निवासी योगेश कुमार पुत्र विक्रम सिंह का प्रमाण पत्र तीन वर्षों में 34 बार खारिज किया गया, लेकिन जैसे ही मामला न्यायालय में गया, उसी प्रक्रिया में एक सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण बताया।

धरने में वक्ताओं ने कहा कि आरटीआई और विभिन्न न्यायिक आदेशों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि हिंदू जुलाहा समाज कोरी जाति के अंतर्गत आता है और अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल है, इसके बावजूद “साक्ष्य अपूर्ण है” या “जाति तस्दीक नहीं हुई” जैसे कारण देकर आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।

प्रदेशभर से जुटे लोग, शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन

यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से आयोजित किया गया। इसमें मेरठ, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।

समाज की प्रमुख मांगें

धरने में समाज की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं। पहली मांग यह रही कि जाति प्रमाण पत्र बिना किसी उत्पीड़न और देरी के सुगमता से जारी किए जाएं तथा शासनादेशों और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन किया जाए। दूसरी मांग में संत कबीर साहेब जी की जयंती पर उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने और उनके नाम पर धर्मशाला निर्माण की मांग शामिल रही। तीसरी मांग में वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर मेरठ में किसी प्रमुख चौराहे का नामकरण और उनकी प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठाई गई।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा उनकी मांगों पर जल्द लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना स्थल पर लोगों ने कहा कि यह लड़ाई केवल प्रमाण पत्र की नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की है।

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