रोबोटिक बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी से 61-वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी, मिला सेम-डे डिस्चार्ज
रोजाना 70 मिनट साइकिल चलाने व पैदल चलने से घुटने के दर्द से मिल सकता है छुटकारा
मेरठ। जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक और विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नई दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के डॉक्टरों ने दोनों घुटनों में गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित 61-वर्षीय मरीज की सफल डे-केयर रोबोटिक आर्म-असिस्टेड बाइलेटरल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की। इस सफल प्रक्रिया के बाद मरीज को उसी दिन हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई, जो आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और एडवांस्ड रिकवरी प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
मीडिया को जानकारी देते हुए डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी ने बताया पूनम संगल, पिछले कई वर्षों से दोनों घुटनों के गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रही थीं। दोनों घुटनों में लगातार दर्द के कारण उनकी चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा था। सीढ़ियां चढ़ना, पैदल चलना और घरेलू कार्य करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था। दवाओं और अन्य पारंपरिक उपचारों के बावजूद उनकी समस्या लगातार बढ़ती गई, जिसके बाद उन्होंने विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक उपचार लेने का निर्णय लिया। विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद उन्हें डे-केयर बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी गई।
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत, मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के चेयरमैन एंड चीफ़ - डॉ. सुजॉय भट्टाचार्जी, ने बताया कि “घुटनों का ऑस्टियोआर्थराइटिस बढ़ती उम्र में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। संगल के दोनों घुटने गंभीर रूप से प्रभावित थे, जिससे उनकी गतिशीलता और स्वतंत्रता काफी सीमित हो गई थी। रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट तकनीक ने हमें सर्जरी की योजना अत्यंत प्रिसिशन और एक्यूरेसी के साथ बनाने में मदद की, जिससे बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सके।”
रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ इसका डे-केयर मॉडल है, जो मरीजों को तेजी से रिकवरी और जल्द चलने-फिरने में सक्षम बनाता है। यह एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसके कारण रक्तस्राव कम होता है, दर्द अपेक्षाकृत कम रहता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होते हैं। लोकल एनेस्थीसिया का प्रभाव समाप्त होते ही मरीजों को रिहैबिलिटेशन संबंधी व्यायाम शुरू करा दिए जाते हैं। इसके बाद सहारे के साथ चलना और फिर बिना सहारे चलने की प्रक्रिया शुरू होती है। कई मरीज तो कुछ ही समय में सीढ़ियां चढ़ने में भी सक्षम हो जाते हैं।
हॉस्पिटल में की जाने वाली सभी सर्जरी स्टेपल-लेस या स्यूचर-लेस होती हैं। सर्जरी के बाद केवल एक साधारण वाटर-रेसिस्टेंट स्ट्रैप लगाया जाता है, जिसे मरीज 12 दिन बाद स्वयं हटा सकते हैं और इसके लिए उन्हें हॉस्पिटल आने की आवश्यकता नहीं होती। प्रत्येक मरीज के लिए एक सख्त उपचार एवं रिकवरी प्रोटोकॉल अपनाया जाता है, जिसकी निगरानी विशेषज्ञ डॉक्टरों की समर्पित टीम द्वारा की जाती है। आपातकालीन परिस्थितियों में भी यह टीम हर समय उपलब्ध रहती है। अब तक के अनुभव में मरीजों के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं।
रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के फायदों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. भट्टाचार्जी, ने कहा, “आज नी रिप्लेसमेंट कराने वाले मरीज सर्जरी के उसी दिन स्वतंत्र रूप से चलना शुरू कर सकते हैं और अधिकांश मरीजों को 48 घंटे के भीतर छुट्टी दे दी जाती है। यह पारंपरिक सर्जरी की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है, जो मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाती है। रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी बेहतर सर्जिकल सटीकता, कम कॉम्प्लीकेशन्स और तेज रिकवरी सुनिश्चित करती है। रियल-टाइम इमेजिंग और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से अब हम प्रत्येक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुरूप अत्यधिक सटीक इम्प्लांट प्रदान कर सकते हैं।”


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