60-70 साल पुराने पेड़ों पर चली आरी तो भड़के व्यापारी!
मेरठ के छीपी टैंक में हंगामा, आदेश की कॉपी मांगते ही टीम हुई रवाना
मेरठ। शहर के छीपी टैंक क्षेत्र में शनिवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब आर जी डिग्री कॉलेज के सामने वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काटने का काम शुरू कर दिया गया। पेड़ कटते देख स्थानीय व्यापारियों और आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर इसका कड़ा विरोध किया। व्यापारियों का आरोप है कि पेड़ काट रहे लोगों से जब पूछा गया कि आखिर किसके आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है तो उन्होंने जिलाधिकारी के आदेश का हवाला दिया, लेकिन जब उनसे आदेश की लिखित प्रति दिखाने को कहा गया तो वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। आरोप है कि इसके बाद पेड़ काटने वाले अपना सामान मौके पर छोड़कर वहां से चले गए।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में व्यापारी मौके पर एकत्र हो गए। व्यापारियों का कहना था कि जिन पेड़ों को काटा जा रहा था, वे कई दशक पुराने हैं और वर्षों से राहगीरों को छाया देने के साथ-साथ क्षेत्र के पर्यावरण को संतुलित रखने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन पेड़ों की उम्र लगभग साठ से सत्तर वर्ष के बीच है और इन्हें बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक आदेश के काटना उचित नहीं है।
विरोध के दौरान व्यापारी शीशपाल ने आरोप लगाया कि पेड़ काटने की कार्रवाई के दौरान उनके प्रतिष्ठान को भी नुकसान पहुंचा। उनका कहना है कि मशीन चलाने के दौरान उनकी दुकान के शीशे टूट गए और दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने इस नुकसान की भरपाई कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पेड़ कटने के कारण सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बाधित हो गया, जिससे क्षेत्र में लंबा जाम लग गया। दोनों ओर वाहनों की कतारें लगने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए व्यापारियों ने स्वयं आगे बढ़कर सड़क पर पड़े पेड़ों के बड़े-बड़े टुकड़ों को किनारे कराया, जिसके बाद धीरे-धीरे वाहनों का आवागमन सामान्य हो सका।
व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से वास्तव में पेड़ काटने का कोई आदेश जारी किया गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने दबंगई दिखाते हुए बिना पारदर्शिता के इस कार्रवाई को अंजाम देने का प्रयास किया, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।
घटना के बाद क्षेत्र में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। व्यापारी प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पेड़ काटने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।


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