वेनेजुएला में अब तक 1430 मौतें, 69 हजार लापता…
मलबे में जिंदगी तलाश रहे 20 देशों के 2,000 बचावकर्मी
वेनेजुएला। वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 1,430 लोगों की मौत हो चुकी है और 69 हजार लोग लापता हैं। 20 देशों के 2,000 से ज्यादा बचावकर्मी मलबे में जिंदा लोगों की तलाश कर रहे हैं। राहत कार्य के बीच लोगों में सरकार की कार्रवाई को लेकर नाराजगी भी बढ़ रही है।
वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। भूकंप के तीन दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक 1,430 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 68,900 लोग लापता हैं। मलबे में दबे लोगों को जिंदा निकालने के लिए समय के साथ दौड़ जारी है। इसी वजह से दुनिया के करीब 20 देशों से 2,000 से ज्यादा बचावकर्मी वेनेजुएला पहुंच चुके हैं और लगातार राहत कार्य में लगे हैं।शनिवार तक 17 विमानों के जरिए 1,600 से ज्यादा विदेशी रेस्क्यूकर्मी देश पहुंच चुके थे। बाद में और टीमें भी आईं. इनमें अमेरिका, मेक्सिको, ब्राजील, फ्रांस, अल सल्वाडोर समेत कई देशों के एक्सपर्ट शामिल हैं।
बचाव दल भारी मशीनों, खोजी उपकरणों और स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं. सबसे ज्यादा तबाही ला ग्वाइरा राज्य में हुई है. यहां लोग अपने परिजनों और पड़ोसियों को बचाने के लिए फावड़े, रस्सियां, भारी मशीनें और कई जगह हाथों से मलबा हटा रहे हैं। कई लोग टूटी हुई इमारतों के ऊपर चढ़कर अपने परिवार वालों के नाम पुकार रहे हैं, ताकि अगर कोई जिंदा हो तो उसकी आवाज सुनाई दे सके। धूल, तेज गर्मी और शवों से उठती बदबू के बीच बचाव अभियान लगातार जारी है।
राहत कार्य को लेकर नाराजगी
इस बीच सरकार के राहत कार्य को लेकर लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। कई लोगों का कहना है कि सेना, पुलिस और प्रशासन इस बड़ी आपदा के लिए तैयार नहीं थे। लोगों का आरोप है कि शुरुआती घंटों में सरकारी मदद बहुत कम दिखाई दी, जबकि भूकंप के बाद हर मिनट किसी की जान बचाने के लिए बेहद अहम होता है।
स्थानीय महिला मिलेडी रोमेरो ने कहा कि रात में कई लोग मलबे के नीचे जिंदा थे, लेकिन उन्हें समय पर नहीं निकाला गया। वहीं येसन मार्कानो नाम के एक युवक ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी कर्मचारी मौके पर आए, फोटो खिंचवाई और चले गए, जबकि स्थानीय लोग पिछले तीन दिनों से लगातार खुद राहत कार्य कर रहे हैं। एक जगह लोगों ने गुस्से में सरकारी खुदाई मशीन को रोक दिया, क्योंकि उनका कहना था कि अधिकारी बिना मदद किए लौट रहे थे।
भूकंप से 60 लाख लोग प्रभावित
संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियों के अनुसार, भूकंप के बाद पहले 48 से 72 घंटे किसी भी व्यक्ति को जिंदा निकालने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।अगर मलबे में फंसे लोगों को पानी और हवा मिलती रहे, तो उनके बचने की उम्मीद कुछ और दिनों तक बनी रह सकती है।
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) का अनुमान है कि इस आपदा से 60 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें अकेले राजधानी कराकास के करीब 20 लाख लोग शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों भूकंप कम गहराई में और बहुत कम समय के अंतर पर आए, इसलिए नुकसान कई गुना बढ़ गया। शनिवार को 4.8 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी महसूस किया गया, जिससे लोगों में फिर दहशत फैल गई।


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