कानपुर में 105 साल पुरानी लाल इमली मिल के घंटाघर की सुइयां गायब
112 सुरक्षा कर्मी थे तैनात, जमीन खा गई कि आसमान निगल गया
कपड़ा मंत्रालय ने मिल प्रशासन से तलब की रिपोर्ट, टूट गईं या चोरी हुईं किसी को नहीं पता
कानपुर। पूरब के मैनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर की औद्योगिक धरोहर 105 साल पुरानी लाल इमली मिल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला मिल परिसर में स्थित एक सदी पुराने क्लॉक टावर की गायब सुइयों का है। 128 फीट ऊंचे इस टावर से सुइयों के गायब होने की गंभीरता को देखते हुए कपड़ा मंत्रालय ने स्थानीय प्रशासन से मामले की पूरी जानकारी तलब की है। इस घंटाघर की गायब सुइयों के बारे में अभी तक कुछ नहीं पता लगा है।
इस घटना का पता सबसे पहले 5 जून को चला, जब टावर की घड़ी बिना सुइयों के दिखाई दी। मिल अधिकारियों का शुरुआती आकलन था कि हालिया मौसम खराब होने और तेज हवाओं के चलने से सुइयां टूटकर नीचे गिर गई होंगी। 16 जून के बाद इस मामले में चोरी की आशंका भी जताई जाने लगी, क्योंकि इतनी ऊंचाई से भारी सुइयों का गायब होना सामान्य नहीं लगता। कपड़ा मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अखिलेश कुमार का कहना है कि आंधी की शुरुआती थ्योरी और चोरी की आशंका, दोनों ही बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
भारी सुरक्षा घेरा सवालों के घेरे में: घंटाघर से सुइयां गायब होने की इस बात ने परिसर की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक पूरी मिल की निगरानी के लिए मौजूदा समय में 112 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। ऐसे में इतनी चौकसी के बीच किसी बाहरी व्यक्ति का इतनी ऊंचाई तक पहुंच जाना बड़ी चूक की तरफ इशारा करता है। हालांकि, लंबे समय से देखरेख की कमी की वजह से टावर का ढांचा काफी पुराना और जर्जर हो चुका है, जिसके चलते प्राकृतिक रूप से सुइयों के गिरने के तर्क को भी नकारा नहीं जा रहा है।
अनदेखी के बीच एक सदी पुरानी विरासत पर संकट
इस क्लॉक टावर का इतिहास 105 साल से भी ज्यादा पुराना है। यह शहर के औद्योगिक वैभव की पहचान रही है। साल 2013 में जब से लाल इमली मिल में कामकाज पूरी तरह बंद हुआ, तब से इस परिसर की ऐतिहासिक चीजों के रखरखाव में लापरवाही की शिकायतें लगातार आती रही हैं। इस समय मिल प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि इस घटना पर कैमरे के सामने कुछ भी स्पष्ट कहने को तैयार नहीं है, जिसके कारण अब हर किसी की निगाहें मंत्रालय की आधिकारिक जांच के नतीजों पर टिकी हैं।


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