तनुजा चौबे के प्रथम कहानी संग्रह 'गुनगुनी धूप' का भव्य लोकार्पण
इन्दौर। वामा साहित्य मंच के सानिध्य में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में लोकप्रिय लेखिका तनुजा चौबे के प्रथम कहानी संग्रह 'गुनगुनी धूप' का लोकार्पण संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ वाणी जोशी द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ।
मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने स्वागत भाषण में लेखिका की अनवरत लेखन ऊर्जा और साहित्यिक संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा, "लिखते हैं तो छपना भी चाहिए। तनुजा जी का लेखन एक शांत सरोवर जैसा है; जैसे गुनगुना पानी स्नान में सुकून देता है, वैसे ही उनकी कहानियां 'गुनगुनी धूप' की तरह मन को तृप्ति देती हैं।" इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों एवं परिवारजनों ने कृति का विधिवत लोकार्पण किया। समारोह का विशेष आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार श्री सूर्यकांत नागर जी का सम्मान रहा, जिनके लिए रश्मि चौधरी ने स्नेहपूर्ण सम्मान-पत्र का वाचन किया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. गरिमा संजय दुबे ने संग्रह की कहानियों पर चर्चा करते हुए उनके शिल्प और भावनात्मक गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये कहानियां अपनी मासूमियत और सरलता में अत्यंत सम्प्रेषणीय हैं। मौलिकता पर बल देते हुए डॉ. दुबे ने कहा, "लेखन में अपना 'डीएनए' स्वतः झलकना चाहिए। यदि सब एक ही सांचे में ढल जाएं तो समाज रोबोट बन जाएगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कहानियां कल्पना लोक के बजाय यथार्थ भाव और समाधान प्रस्तुत करती हैं, जहां पीड़ा को बिना किसी हाहाकार के छुआ गया है।
संग्रह की 24 कहानियों में से उन्होंने 'अंधा कौन', 'विश्वास की जड़', 'जाम का पेड़', 'वसीयतनामा' और 'भाजा' जैसी रचनाओं का विशेष उल्लेख किया, जो महिला अधिकारों, पर्यावरण प्रेम और रिश्तों की गरिमा को बखूबी निभाती हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली) ने अपने संबोधन में इसे मानवीय संवेदनाओं की एक ईमानदार अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा, "तनुजा जी ने बनावटी शिल्प के बजाय नैसर्गिक सौंदर्य के साथ साधारण जीवन से गहरे कथा-बीज चुने हैं। रचनाएँ अपनी नियति खुद तय करती हैं और लेखक को स्वयं अपनी रचना का पहला निर्णायक होना चाहिए।" उन्होंने इस प्रयास को 'सौ में सौ अंक' देते हुए लेखकों को डिजिटल तकनीक के प्रभाव से बचकर मौलिकता बचाए रखने की सलाह दी।
तत्पश्चात लेखिका तनुजा चौबे ने अपनी सृजन प्रक्रिया साझा की। उन्होंने बताया कि इस संग्रह में बचपन से लेकर अब तक के अनुभवों, स्त्री-मन के अनकहे संवादों और सामाजिक यथार्थ को पिरोया गया है। उन्होंने अपनी पहली कहानी 'कच्ची धूप' का वाचन किया और इस कृति को श्री सूर्यकांत नागर जी को समर्पित करते हुए अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
'परिवार की पाती' के वाचन ने वातावरण को भावुक कर दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संजय पटेल ने किया। समारोह में किसलय पंचोली, राजेश चौबे, शुभांगी व्यास, पद्मा राजेन्द्र, अद्विता चौबे, सपना सी.पी. साहू, अवंती श्रीवास्तव, देवम चौबे, प्रीति मकवाना, दामिनी ठाकुर और कनुप्रिया चौबे सहित कई प्रबुद्धजनों ने अतिथियों का स्वागत किया। लेखिका का स्वागत विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष द्वारा भी किया गया। अंत में, वामा साहित्य मंच की सहसचिव अंजना चक्रपाणि मिश्र ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे।


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