अंतरिक्ष कानूनों एवं नीतियों के निर्माण विषय पर  शोधार्थी मोलिक शर्मा को पीएच.डी. उपाधि प्रदान

मेरठ।शोभित विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ लॉ एंड कॉन्स्टिट्यूशनल स्टडीज़ विभाग शोध के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है। विश्वविद्यालय के शोधार्थी  मोलिक शर्मा को “स्पेस लॉ” (अंतरिक्ष विधि) जैसे उभरते एवं अत्यंत विशिष्ट क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य हेतु पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई।

 मोलिक शर्मा ने “भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यवसायीकरण हेतु प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष कानूनों एवं नीतियों का निर्माण” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। यह शोध भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी, निवेश, नीति निर्माण एवं प्रभावी विधिक ढांचे की आवश्यकता पर आधारित एक महत्त्वपूर्ण एवं समसामयिक अध्ययन है। शोध में भारत के उभरते हुए स्पेस सेक्टर के समक्ष मौजूद कानूनी चुनौतियों, संभावनाओं एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप नीतिगत सुधारों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

 मोलिक शर्मा ने अपना यह शोध कार्य डॉ. सीमा मोदी के निर्देशन में पूर्ण किया। उनके मार्गदर्शन में संपन्न यह शोध कार्य स्पेस लॉ जैसे आधुनिक एवं उभरते विधिक क्षेत्र में अकादमिक उत्कृष्टता का उदाहरण माना जा रहा है।

 प्रो-वाईस चांसलर प्रो. (डॉ.) जयानंद  ने कहा कि वर्तमान समय में अंतरिक्ष क्षेत्र केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, वैश्विक निवेश एवं तकनीकी नवाचार से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत में स्पेस सेक्टर के तीव्र विस्तार को देखते हुए इस प्रकार के शोध कार्य भविष्य की नीतियों एवं विधिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एसएलसीएस के निदेशक प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार शर्मा ने इसे “उभरते विधिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट अकादमिक शोध” बताते हुए कहा कि शोभित विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को भविष्य के वैश्विक विषयों पर शोध के लिए निरंतर प्रेरित कर रहा है।

शोध कार्य के बाह्य परीक्षक प्रो. (डॉ.) सिद्धार्थ मिश्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी शोध विषय की प्रासंगिकता एवं गुणवत्ता की सराहना की।

विद्यालय प्रशासन ने कहा कि शोभित विश्वविद्यालय स्पेस लॉ, साइबर लॉ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लॉ तथा अन्य उभरते विधिक क्षेत्रों में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु निरंतर कार्य कर रहा है, ताकि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को वैश्विक स्तर के शोध अवसर एवं अकादमिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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