दिनचर्या के बदलाव से थमेगा बच्चों में मोटापा
जीवनशैली में बदलावों के चलते बच्चों में बढ़ता मोटापा स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ी चुनौती है। बड़ी उम्र में इससे कई हेल्थ प्रॉब्लम पैदा हो सकती हैं। इसकी प्रमुख वजहों में असंतुलित खानपान व निष्क्रियता वाली दिनचर्या है। पैरेंट्स बच्चों में स्वास्थ्यवर्धक भोजन की आदतें डालने व शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कुछ दशक पहले एक मोटा बच्चा स्वस्थ माना जाता था। यानी ऐसा बच्चा जो कुपोषण और संक्रमण की कठिनाइयों से बचने की अधिक संभावना रखता हो। दरअसल, वजन बढ़ने का मूल सिद्धांत यह है कि जब ऊर्जा या कैलोरी का सेवन ऊर्जा उपयोग से 3500 किलोकैलोरी अधिक हो जाता है, तो एक पाउंड वजन बढ़ता है। इस हिसाब से प्रतिदिन केवल 10 किलोकैलोरी की अतिरिक्त मात्रा एक वर्ष में 10 पाउंड वजन बढ़ा सकती है।
हालांकि मोटापा बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और यह उन्हें भावनात्मक एवं मानसिक रूप से भी प्रभावित करता है। खासकर मोटे बच्चे अपने साथियों द्वारा चिढ़ाए जाने का सामना करते हैं। इसके अलावा, वे जीवन में कुछ अन्य घातक स्थितियों का शिकार भी हो सकते हैं। मसलन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, नींद से जुड़ी समस्याएं, त्वचा संक्रमण, समय से पहले युवावस्था, खान-पान विकार व श्वसन समस्याएं आदि।
प्रमुख वजह है जीवनशैली
दिनचर्या व खानपान: आजकल बाल्यावस्था में मोटापे का मुख्य कारण जीवनशैली का पैटर्न है। इसमें बच्चे की दिनचर्या जिसमें सोने की अवधि, चलना, बाहरी गतिविधियां, टीवी देखने के घंटे, बाहर खाना खाने की आवृत्ति, स्कूल में किए जाने वाले भोजन के प्रकार, बीच-बीच में खाने की आदतें व टीवी देखते समय अधिक एनर्जी प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन शामिल है।
फॉर्मूला दूध : प्रारंभिक शैशवावस्था में बच्चों को फॉर्मूला दूध देना भी बच्चों में अधिक वजन और मोटापे को प्रभावित करता है।
कैलोरी व उसके स्रोत की भूमिका : केवल अधिक कैलोरी लेना ही समस्या नहीं है, बल्कि उनका स्रोत भी महत्वपूर्ण है, जैसे अनाज, सब्जियां, दालें व फल कम वसा यानी फैट बढ़ाने वाले होते हैं, जबकि मिठाइयां, परिष्कृत बेकरी उत्पाद, पिज़्ज़ा, पैटीज़ आदि के सेवन से वसा अधिक मात्रा में बढ़ती है।
निष्क्रियता का असर : जो बच्चे शारीरिक रूप से निष्क्रिय होते हैं, उनमें मोटापे की संभावना उन बच्चों की तुलना में अधिक होती है जो सक्रिय रहते हैं, नियमित रूप से खेल-कूद व योग करते हैं यानी मैदानों व पार्कों में खेलते हैं।
उपचार और रोकथाम
- घर में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे स्वास्थ्यवर्धक भोजन के लिए समय निकालें, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दें, टीवी देखने का समय सीमित करें और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों को घर यानी उसकी पहुंच से हटाएं।
- स्कूलों को शारीरिक शिक्षा, खेल और मध्याह्न भोजन के लिए सख्त मानक स्थापित करने चाहिए। अस्वास्थ्यकर भोजन को स्कूल कैंटीन से हटाया जाना चाहिए।
- शहरी योजना ऐसी होनी चाहिए कि हर क्षेत्र या मोहल्ले में पार्क/खेल के मैदान, फुटपाथ, पैदल चलने के क्षेत्र और खुले स्थान उपलब्ध हों।
- फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक्स के प्रयोग पर रोक लगाया जाना चाहिए। वहीं पौष्टिक खाद्य पदार्थों जैसे फल और सब्जियों पर सब्सिडी दी जानी चाहिए।
- पूरे परिवार को परामर्श दिया जाना चाहिए ताकि वे अपने बच्चे को प्रोत्साहित कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए सकारात्मक समर्थन दे सकें।


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